Samrat Cabinet Expansion: सम्राट कैबिनेट का कब होगा विस्तार, अभी सीएम और डिप्टी सीएम ही चलाएंगे सरकार, जानिए नए मंत्रिमंडल का फॉर्मूला

Samrat Cabinet Expansion: सम्राट चौधरी की ताजपोशी हो चुकी है। बिहार के 24वें सीएम और बीजेपी के पहले सीएम सम्राट चौधरी बन गए हैं। वहीं अब सम्राट कैबिनेट के विस्तार को लेकर चर्चाएं तेज हो गई है।

कब होगा सम्राट कैबिनेट का विस्तार? - फोटो : social media

Samrat Cabinet Expansion: बिहार में नई सरकार का गठन हो गया है। दो दशक के बाद नीतीश कुमार की बिहार से विदाई हो गई है। पहली बार राज्य में बीजेपी के मुख्यमंत्री बने हैं। नीतीश सरकार के अंत के बाद अब प्रदेश में सम्राट सरकार है। शपथ ग्रहण समारोह के बाद से ही सीएम सम्राट चौधरी एक्शन मोड में आ गए हैं। सम्राट चौधरी के साथ जदयू कोटे से दो उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव ने भी शपथ ली। फिलहाल सम्राट कैबिनेट में 2 ही मंत्री हैं। 

सम्राट कैबिनेट का विस्तार

सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार मई महीने में सम्राट कैबिनेट का विस्तार हो सकता है। फिलहाल मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्रियों के बीच सभी विभागों का बंटवारा कर दिया गया है। नई एनडीए सरकार में मंत्री बनने के इच्छुक नेताओं को अगले महीने तक इंतजार करना पड़ सकता है। नीतीश कुमार के इस्तीफे के साथ ही पिछली कैबिनेट भंग हो गई थी, जिसके बाद अब नए सिरे से मंत्रिमंडल का गठन किया जाना है।

मंत्रिमंडल विस्तार देरी क्यों? 

कैबिनेट विस्तार में देरी की एक बड़ी वजह पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव माने जा रहे हैं। माना जा रहा है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही बिहार में मंत्रिमंडल का विस्तार किया जाएगा। ऐसे में मई के पहले सप्ताह यानी 4 मई के बाद नए मंत्रियों के शपथ लेने की संभावना जताई जा रही है।

पुराना फॉर्मूला बरकरार रहने के संकेत

नई सरकार के स्वरूप में बड़े बदलाव की संभावना कम है। एनडीए के सहयोगी दलों की भूमिका पहले जैसी ही रहने की उम्मीद है, हालांकि इस बार भाजपा ‘बड़े भाई’ की भूमिका में नजर आएगी। जदयू की भागीदारी बनी रहेगी और नीतीश कुमार का प्रभाव भी कायम रहने की बात कही जा रही है। इसके अलावा लोजपा (रामविलास), रालोमो और हम (से) जैसे सहयोगी दलों को भी सरकार में प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना है।

पुराने चेहरे को मिलेगी जगह 

सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट में अधिकतर पुराने चेहरों को ही जगह मिलेगी, जबकि नए चेहरों की संख्या सीमित रह सकती है। कुछ मौजूदा नेताओं को बाहर किए जाने की भी संभावना जताई जा रही है। सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार नई कैबिनेट में भाजपा के मंत्रियों की संख्या जदयू से अधिक रहने की संभावना है। भाजपा और जदयू के अनुभवी नेताओं को प्राथमिकता मिलने के संकेत हैं, जिन पर पार्टी नेतृत्व का भरोसा बना हुआ है।