न्यूज4नेशन की खबर का असर: नीलाम होने जा रही सासामुसा चीनी मिल के पुनरुद्धार की कवायद शुरू, मुख्य सचिव ने दिए निर्देश

गोपालगंज की बंद पड़ी सासामुसा चीनी मिल को लेकर नीतीश सरकार ने अपने रुख में बड़ा बदलाव किया है। नीलामी की आहट के बीच मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने उच्च स्तरीय बैठक कर मिल को दोबारा शुरू करने का रोडमैप तैयार करने का निर्देश दिया है।

Patna - गोपालगंज के हजारों गन्ना किसानों के लिए राहत भरी खबर है। न्यूज4नेशन द्वारा सासामुसा चीनी मिल की नीलामी और किसानों की बदहाली पर प्रमुखता से खबर प्रकाशित किए जाने के बाद बिहार सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। गुरुवार को बिहार के मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में बंद पड़ी सासामुसा चीनी मिल को पुनः चालू करने की संभावनाओं पर गहन चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को सख्त निर्देश दिए हैं कि मिल से जुड़े सभी प्रशासनिक, तकनीकी और वित्तीय अड़चनों को समयबद्ध तरीके से दूर किया जाए ताकि मिल का परिचालन फिर से शुरू हो सके। 

कर्नाटक की कंपनी ने जताई रुचि, पुनरुद्धार की जगी उम्मीद

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में एक बड़ा सकारात्मक मोड़ तब आया, जब निरानी सुगर्स लिमिटेड, कर्नाटक के प्रबंध निदेशक विशाल निरानी ने सासामुसा मिल के पुनरुद्धार में अपनी अभिरुचि दिखाई। इस निवेश प्रस्ताव ने मिल के भविष्य को लेकर नई उम्मीदें जगा दी हैं। मुख्य सचिव ने गन्ना उद्योग और ऊर्जा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे आपसी समन्वय के साथ कार्य करें और निवेशक के साथ मिलकर मिल को क्रियाशील बनाने के लिए लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाएं। 

किसानों का 46 करोड़ का बकाया और नीलामी का संकट

सासामुसा चीनी मिल क्षेत्र के हजारों किसानों की आर्थिक लाइफलाइन रही है, लेकिन वर्तमान में उन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। साल 2018 के हादसे के बाद से मिल की स्थिति जर्जर है और किसानों का लगभग 46 करोड़ रुपये बकाया है। भारतीय दिवाला एवं शोधन अक्षमता बोर्ड (IBBI) द्वारा 17 फरवरी 2026 को मिल की जमीन की नीलामी की तारीख तय किए जाने से किसानों में हड़कंप मचा था। अब सरकार की इस ताजा पहल से किसानों को उम्मीद है कि उनकी बकाया राशि का भुगतान होगा और मिल की जमीन को बिकने से बचाया जा सकेगा। 

न्यूज4नेशन की मुहिम लाई रंग

गौरतलब है कि बीते 3 फरवरी को न्यूज4नेशन ने 'जिन 25 चीनी मिलों को सरकार ने शुरू करने का लिया फैसला, उसमें सासामुसा शामिल नहीं' शीर्षक से खबर प्रकाशित कर सरकार का ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर खींचा था। खबर में बताया गया था कि कैसे मुख्यमंत्री की 'समाधान यात्रा' के दौरान किए गए वादे ठंडे बस्ते में चले गए थे और मिल की बेशकीमती जमीन कौड़ियों के भाव नीलाम होने की कगार पर थी। मीडिया में खबर आने के बाद शासन स्तर पर हलचल तेज हुई और अंततः सरकार को अपना रुख बदलने पर विचार करना पड़ा। 

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

बैठक के दौरान मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने स्पष्ट किया कि सासामुसा चीनी मिल का पुनरुद्धार केवल एक औद्योगिक इकाई को बचाना नहीं है, बल्कि यह स्थानीय रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। उन्होंने कहा कि मिल चालू होने से न केवल गन्ना किसानों को लाभ होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के हजारों अवसर पैदा होंगे। सरकार अब इस प्रयास में है कि तकनीकी बाधाओं को दूर कर जल्द से जल्द मिल में पेराई सत्र की तैयारी शुरू की जा सके। 

आंदोलन की आहट के बीच सरकार की सक्रियता

नीलामी की तारीख नजदीक आने और सरकारी बेरुखी को देखते हुए क्षेत्र के किसान एक बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे थे। दिसंबर में हुए धरने और विधायक के आश्वासनों के विफल होने के बाद किसानों का धैर्य जवाब दे रहा था। हालांकि, 12 फरवरी की इस उच्च स्तरीय बैठक और मुख्य सचिव के कड़े रुख ने फिलहाल आक्रोश को शांत करने का काम किया है। अब सबकी नजरें 17 फरवरी की समयसीमा पर टिकी हैं कि क्या सरकार नीलामी प्रक्रिया को रोककर मिल को नए निवेशकों के हाथों में सौंपने में सफल होती है।