दारोगा-सिपाहियों पर सीधे गिरेगी गाज! नीतीश सरकार ने 11 जिलों के ग्रामीण एसपी को दी 'निलंबन' वाली महाशक्ति
बिहार के 11 जिलों में ग्रामीण एसपी के पावर और थानों का बंटवारा कर दिया गया है। अब दारोगा और सिपाहियों पर सीधे ग्रामीण एसपी की गाज गिर सकेगी। गया में सबसे ज्यादा तो सहरसा में सबसे कम थाने आवंटित किए गए हैं।
Patna - बिहार में पुलिसिंग व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने के लिए नीतीश कुमार सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। गृह मंत्री सम्राट चौधरी की मंजूरी मिलने के बाद गृह विभाग ने राज्य के 11 महत्वपूर्ण जिलों में तैनात ग्रामीण पुलिस अधीक्षकों (एसपी) के क्षेत्राधिकार और शक्तियों का स्पष्ट निर्धारण कर दिया है। सरकार द्वारा जारी इस नवीनतम नोटिफिकेशन के बाद अब इन जिलों के अनुमंडलों और थानों का स्पष्ट बंटवारा कर दिया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था की कमान अब सीधे ग्रामीण एसपी के हाथों में होगी।
ग्रामीण एसपी की शक्तियों को स्पष्ट करते हुए सरकार ने बताया है कि वे अपने आवंटित क्षेत्र के अधीन आने वाले केसों की समीक्षा, अनुसंधान और अपराध नियंत्रण के कार्यों को स्वतंत्र रूप से देखेंगे। ग्रामीण एसपी को अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए भी सशक्त बनाया गया है, जिसके तहत वे अपने कार्यक्षेत्र में आने वाले दारोगा, सिपाही और हवलदार को सीधे निलंबित कर सकेंगे। हालांकि, पुलिस लाइन के पदाधिकारियों के निलंबन और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर उन्हें जिला एसपी के साथ समन्वय और विमर्श करना अनिवार्य होगा।
जिलों के बंटवारे पर नजर डालें तो गया जिला पुलिसिंग के लिहाज से सबसे बड़ा ग्रामीण केंद्र बनकर उभरा है। गया के ग्रामीण एसपी के अधीन नीमचक बथानी, टिकारी, इमामगंज और शेरघाटी जैसे महत्वपूर्ण अनुमंडल दिए गए हैं, जिनमें कुल 33 थाने शामिल हैं। मुजफ्फरपुर में पूर्वी–1, पूर्वी–2 और सरैया अनुमंडलों के साथ 24 थानों की कमान ग्रामीण एसपी को सौंपी गई है, जबकि रोहतास के ग्रामीण एसपी के अधिकार क्षेत्र में डिहरी, विक्रमगंज और कोचस के साथ कुल 28 थाने रखे गए हैं।
मिथिला और कोसी क्षेत्र में भी प्रशासन ने कार्यक्षेत्र का बंटवारा बारीकी से किया है। दरभंगा में बेनीपुर, बिरौल और सदर के साथ 19 थाने ग्रामीण एसपी के अधीन होंगे, जबकि सहरसा में सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल के तहत 9 थाने आवंटित किए गए हैं। भागलपुर में कहलगांव और विधि-व्यवस्था डीएसपी के अंतर्गत आने वाले 18 थानों की जिम्मेदारी ग्रामीण एसपी की होगी। इसी तरह पूर्णिया और सारण जिलों में भी ग्रामीण एसपी को 18-18 थानों की कमान सौंपकर अपराध नियंत्रण का टास्क दिया गया है।
सीमावर्ती और अन्य जिलों की बात करें तो बेतिया के ग्रामीण एसपी के तहत सदर–2 और नरकटियागंज अनुमंडल के 21 थाने आएंगे। मुंगेर के ग्रामीण एसपी को मुंगेर सदर, तारापुर और हवेली खड़गपुर के 12 थानों की निगरानी करनी होगी। वहीं बेगूसराय में मंझौल, बखरी और बलिया के 11 थानों को ग्रामीण एसपी के अधिकार क्षेत्र में शामिल किया गया है। यह व्यवस्था मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों में पुलिस की सक्रियता बढ़ाने और स्थानीय समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए लागू की गई है।
सरकार के इस फैसले से जिला पुलिस अधीक्षकों (मेन एसपी) पर काम का बोझ कम होगा और वे शहरी क्षेत्रों की कानून-व्यवस्था पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। 2022 में गठित किए गए इन 11 ग्रामीण एसपी पदों को अब पूर्णतः क्रियाशील कर दिया गया है। गृह विभाग का मानना है कि इस स्पष्ट क्षेत्राधिकार निर्धारण से ग्रामीण थानों की कार्यप्रणाली में सुधार आएगा और अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियानों में अधिक तेजी और प्रभावी समन्वय देखने को मिलेगा।
|
जिला | ग्रामीण एसपी का क्षेत्राधिकार (अनुमंडल/SDPO) | थानों की संख्या | |
| गया | नीमचक बथानी, टिकारी, इमामगंज, शेरघाटी–1 एवं शेरघाटी–2 | 33 थाने | |
| मुजफ्फरपुर | मुजफ्फरपुर पूर्वी–1, पूर्वी–2 और सरैया | 24 थाने | |
| रोहतास | कोचस (SDPO-2), डिहरी (SDPO-2) और विक्रमगंज | 28 थाने | |
| बेतिया | सदर–2 और नरकटियागंज | 21 थाने | |
| दरभंगा | बेनीपुर, बिरौल और सदर (SDPO-2) | 19 थाने | |
| भागलपुर | कहलगांव–1, कहलगांव–2 और विधि–व्यवस्था DSP क्षेत्र |
18 थाने | |
| पूर्णिया | बायसी, बनमनखी और धमदाहा | 18 थाने | |
| सारण | मढ़ौरा–1, मढ़ौरा–2 और सोनपुर | 18 थाने | |
| मुंगेर | मुंगेर सदर, तारापुर और हवेली खड़गपुर | 12 थाने | |
| बेगूसराय | मंझौल, बखरी और बलिया | 11 थाने | |
| सहरसा | सिमरी बख्तियारपुर | 09 थाने | |