सीएम के आगमन से पहले निजी अस्पताल में 'मौत का खेल', दलित महिला की गई जान
शेखपुरा में मुख्यमंत्री के दौरे से पहले अवैध रूप से संचालित एक निजी अस्पताल में गलत इलाज के कारण दलित गर्भवती महिला की मौत हो गई। दलालों के चंगुल में फंसी महिला के परिजनों से 51 हजार रुपये वसूले गए, फिर भी उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
Sheikhpura - शेखपुरा जिले के भोजडीह रोड स्थित 'अनन्या हॉस्पिटल' में मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। नवादा जिले के काशीचक की रहने वाली सोनी देवी को प्रसव पीड़ा के बाद आशा कार्यकर्ता के माध्यम से यहाँ भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल संचालक ने ऑपरेशन के नाम पर 51,000 रुपये की भारी-भरकम राशि वसूली। सरकारी दावों के विपरीत, ज़मीनी स्तर पर सक्रिय दलालों ने एक गरीब परिवार को झांसे में लेकर उन्हें उस मौत के कुएं में धकेल दिया, जिसे अस्पताल का नाम दिया गया था।
इलाज के नाम पर खानापूर्ति और रेफर का खेल
ऑपरेशन की प्रक्रिया शुरू होते ही अस्पताल प्रबंधन ने अपनी अक्षमता को छिपाने के लिए परिजनों को दो यूनिट खून लाने के लिए दौड़ाया। जब परिजन खून लेकर पहुंचे, तब तक स्थिति बिगड़ चुकी थी। अपनी गर्दन बचाने के लिए अस्पताल ने आनन-फानन में मरीज को बिहारशरीफ रेफर कर दिया। एंबुलेंस में ले जाने के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव (Bleeding) के कारण महिला ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। यह स्पष्ट रूप से चिकित्सा लापरवाही और संसाधनों के अभाव में किया गया जानलेवा प्रयास था।
पुराने सौदागर, नया ठिकाना
हैरानी की बात यह है कि जिस अस्पताल में यह घटना हुई, उसके तार पहले सील किए गए 'मां सावित्री हॉस्पिटल' से जुड़े बताए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा एक अस्पताल बंद किए जाने के बाद, वही लोग नया नाम बोर्ड लगाकर फिर से मौत का व्यापार शुरू कर देते हैं। नाम बदल जाते हैं, लेकिन संचालक और उनके काम करने का खौफनाक तरीका वही रहता है। पटेल चौक से भोजडीह रोड तक ऐसे कई क्लीनिक बिना वैध लाइसेंस के फल-फूल रहे हैं।
हंगामे के बाद डॉक्टर और कर्मचारी फरार
महिला की मौत की खबर फैलते ही परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। अनन्या हॉस्पिटल के बाहर जमकर हंगामा हुआ और न्याय की मांग की गई। स्थिति बिगड़ती देख डॉक्टर और अस्पताल के तमाम कर्मचारी ताला लगाकर मौके से फरार हो गए। यह पलायन खुद ही उनकी संलिप्तता और डर को बयां करता है। घटना स्थल पर जुटी भीड़ ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बना रहा।
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर उठते सवाल
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जिले में आगमन से ठीक पहले हुई इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल यह है कि जब प्रशासन को पता है कि क्षेत्र में अवैध क्लीनिक चल रहे हैं, तो उन पर ठोस कार्रवाई क्यों नहीं होती? क्या किसी और गरीब की जान जाने का इंतज़ार किया जा रहा है? अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इन "सफेदपोश अपराधियों" पर क्या कार्रवाई करता है या मामला एक बार फिर फाइलों में दबकर रह जाएगा।
Report - umesh