Bihar Reservation: आरक्षण की समीक्षा हुई तो होगा गृहयुद्ध.. श्याम रजक के बयान से बिहार की सियासत गरम

Bihar Reservation: बिहार में आरक्षण का जिन्न एक बार फिर बोतल से निकल कर सड़क पर निकल आया है। ...

आरक्षण पर भड़का सियासी पारा- फोटो : reporter

Bihar Reservation: बिहार में आरक्षण का जिन्न एक बार फिर बोतल से निकल कर सड़क पर निकल आया है।  बिहार में आरक्षण को लेकर सियासी तकरार अब तीखी बयानबाजी तक पहुंचती दिख रही है। जेडीयू के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री श्याम रजक ने आरक्षण व्यवस्था को लेकर बेहद तल्ख टिप्पणी की है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर आरक्षण में किसी तरह की समीक्षा या बदलाव की कोशिश हुई तो हालात बेहद गंभीर हो सकते हैं और गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।श्याम रजक ने आरक्षण की समीक्षा के सवाल पर अपना रुख बेहद सख्त रखा। उनका कहना है कि आरक्षण में किसी भी तरह की समीक्षा या छेड़छाड़ की बात सामने आती है तो इसका व्यापक विरोध होगा।उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि ऐसी किसी कोशिश का परिणाम बेहद गंभीर हो सकता है। उनके ‘गृहयुद्ध’ वाले बयान ने बिहार की सियासत में आरक्षण के मुद्दे की संवेदनशीलता को फिर सामने ला दिया है।आरक्षण बिहार की राजनीति का लंबे समय से बेहद संवेदनशील मुद्दा रहा है। ऐसे में सत्ता पक्ष के वरिष्ठ नेता की इस तरह की टिप्पणी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है।

श्याम रजक का यह बयान ऐसे वक्त आया है जब पटना में भीम आर्मी के प्रदर्शन को लेकर प्रशासन ने मुख्यमंत्री आवास समेत राजधानी के प्रमुख इलाकों की सुरक्षा बढ़ा दी है। प्रदर्शन को लेकर पहले से ही सियासी माहौल गरम है और इसी बीच आरक्षण के मुद्दे पर जेडीयू नेता का बयान बहस को और हवा दे सकता है।

‘प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार’

भीम आर्मी के प्रदर्शन को लेकर श्याम रजक ने कहा कि किसी भी मुद्दे पर प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने माना कि प्रदर्शन को देखते हुए मुख्यमंत्री आवास की सुरक्षा बढ़ाई गई है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा प्रदर्शन आरक्षण के मुद्दे को लेकर नहीं है।उनके मुताबिक, अगर लोग प्रदर्शन कर रहे हैं तो उन्हें अपना लोकतांत्रिक अधिकार इस्तेमाल करने दिया जाना चाहिए और कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस का काम है।श्याम रजक ने कहा कि प्रदर्शन को लेकर प्रशासन को अपना काम करना चाहिए और शांतिपूर्ण विरोध को लेकर अनावश्यक सियासी रंग देने की जरूरत नहीं है।

छात्र आंदोलन पर भी बोले श्याम रजक

पूर्व मंत्री ने बिहार में हुए छात्र आंदोलन और सरकार की ओर से मानी गई मांगों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलन से जुड़ी कई मांगों को सरकार ने स्वीकार किया है।उन्होंने पुलिसकर्मियों के नेम प्लेट लगाने के आदेश को लेकर कहा कि यह कोई नया प्रावधान नहीं है। उनके अनुसार पुलिसकर्मियों के लिए पहले से ही नेम प्लेट लगाने का आदेश रहा है, लेकिन अगर कहीं उसका पालन नहीं हो रहा था तो उसे सख्ती से लागू करने के लिए दोबारा निर्देश दिए गए हैं।

गड़बड़ी हुई है तो हो जांच

दरोगा भर्ती परीक्षा को स्थगित करने और छात्र आंदोलन से जुड़े दूसरे मामलों पर भी श्याम रजक ने कहा कि अगर कहीं गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच होनी चाहिए।उनका कहना है कि छात्रों की मांगों पर सरकार ने गंभीरता दिखाई है और कई मांगें मान ली गई हैं। ऐसे में इसे किसी बड़ी राजनीतिक साजिश के तौर पर देखने की जरूरत नहीं है।हालांकि आरक्षण के मुद्दे पर उनका कड़ा बयान इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम पहलू बन गया है। प्रदर्शन, पुलिस की बढ़ी सुरक्षा और आरक्षण पर तल्ख बयान इन तीनों ने बिहार की सियासत का तापमान बढ़ा दिया है।अब सवाल यही है कि आरक्षण पर श्याम रजक के ‘गृहयुद्ध’ वाले बयान को विपक्ष किस तरह मुद्दा बनाता है और सरकार इस बयान पर क्या रुख अपनाती है।

रिपोर्ट- अभिजीत सिंह