फर्जीवाड़ा चरम पर! सेवा से बर्खास्त शिक्षकों ने इंटर परीक्षा में की ड्यूटी, निगरानी की जांच धरी की धरी रह गई! प्रधानाध्यापक के खुलासे से विभाग में हड़कंप

जिन शिक्षकों को फर्जी डिग्री के आरोप में निगरानी जांच के बाद सेवा से 'लात' मारकर निकाला गया था, उन्हीं के कंधों पर विभाग ने इंटरमीडिएट परीक्षा की पवित्रता बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंप दी।

Sitamarhi - सीतामढ़ी के बथनाहा प्रखंड से शिक्षा विभाग की एक ऐसी शर्मनाक लापरवाही उजागर हुई है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की जांच में फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र पाए जाने के बाद जिन शिक्षकों को बर्खास्त किया गया था, उन्हें इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 में वीक्षक (इन्विजिलेटर) के रूप में तैनात कर दिया गया। यह मामला तब खुला जब बर्खास्त शिक्षक ड्यूटी पूरी कर अपने मूल विद्यालय विरमण पत्र सौंपने पहुंचे।

बर्खास्तगी का इतिहास

 जानकारी के अनुसार, बथनाहा प्रखंड के सात शिक्षकों को जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) के आदेशानुसार 19 जुलाई 2024 को ही सेवा से बर्खास्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। 24 अगस्त 2024 को नियोजन इकाई की बैठक में इन सभी को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया था। इन पर प्राथमिकी भी दर्ज है, लेकिन हैरानी की बात है कि विभाग के डेटाबेस में ये अब भी 'ड्यूटी के योग्य' बने रहे।

परीक्षा केंद्रों पर तैनात रहे 'फर्जी' शिक्षक

 बर्खास्त शिक्षकों में राम पुकार राय (मध्य विद्यालय सिरसिया) की ड्यूटी सीतामढ़ी उच्च माध्यमिक विद्यालय, डुमरा में और पूनम कुमारी की ड्यूटी रघुनाथ झा कॉलेज परीक्षा केंद्र पर लगाई गई थी। इन शिक्षकों ने न केवल सफलतापूर्वक अपनी ड्यूटी पूरी की, बल्कि यह दावा भी किया कि उनकी तैनाती सीधे जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय से की गई है और आगामी मैट्रिक परीक्षा में भी उन्हें ड्यूटी सौंपी गई है।

प्रधानाध्यापक का खुलासा

 मामला तब और गंभीर हो गया जब विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने स्पष्ट किया कि इन शिक्षकों को 30 अक्टूबर 2024 को ही नियोजन इकाई द्वारा पदमुक्त कर दिया गया था। तत्कालीन डीपीओ के आदेश पर उनकी उपस्थिति दर्ज करने तक पर रोक थी। ऐसे में सवाल उठता है कि जब विद्यालय के स्तर पर उनकी कोई पहचान नहीं थी, तो जिला मुख्यालय की सूची में उनका नाम कैसे शामिल हुआ और उन्हें नियुक्ति पत्र कैसे जारी कर दिया गया?

जाँच का आश्वासन

इस महा-लापरवाही पर घिरे जिला शिक्षा पदाधिकारी राघवेंद्र मणि त्रिपाठी ने बचाव की मुद्रा अपनाते हुए मामले की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि बर्खास्त शिक्षकों को ड्यूटी पर लगाया जाना एक गंभीर विषय है और इसकी जांच कर जिम्मेदारी तय की जाएगी। हालांकि, स्थानीय लोगों और अभिभावकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि परीक्षा जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में अपराधियों और फर्जीवाड़े के आरोपियों को शामिल कर विभाग क्या संदेश देना चाहता है।