Bihar News : ओवरलोडिंग रोकने के लिए बिहार में 'स्मार्ट' तकनीक, पटना हाईकोर्ट में हुई सुनवाई, बिना रोके कटेगा जुर्माना

Bihar News : पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू की खंडपीठ ने सड़क निर्माण से सम्बन्धित विकास कुमार की जनहित याचिका सुनवाई की.....जिसमें

ओवरलोड पर सुनवाई - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : राज्य के विभिन्न राष्ट्रीय उच्च और राजकीय पथों पर वाहनों की ओवरलोडिंग से हो रहे नुकसान को पटना हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया। चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू की खंडपीठ ने सड़क निर्माण से सम्बन्धित विकास कुमार की जनहित याचिका सुनवाई की।इस मामलें पर अगली सुनवाई 12 मई ,2026 को  होगी। आज आरा मोहनियाँ राष्ट्रीय उच्च पथ 30 के पूर्णतः चालू नही होने पर सुनवाई हुई। राज्य के महाधिवक्ता पीके शाही ने  कोर्ट को बताया कि  इस पथ में दो बड़े पुल है,जो वाहनों की ओवरलोडिंग के कारण क्षतिग्रस्त हो गया। इसकी मरम्मती की जा रही है।

इसमें  एनएचएआई ने बताया कि  वाहनों के ओवरलोडिंग से सड़कों को काफी क्षति होती है। इससे सड़कों को सही हालत में चालू रखना कठिन है। कोर्ट के निर्देश पर महाधिवक्ता पीके शाही के कार्यालय में  8और 9 अप्रैल,2026 को सभी सम्बन्धित पक्षों की बैठक हुई।इसमें ये हुआ कि वाहनों की ओवरलोडिंग की समस्या का समाधान किस तरह निकाला जाये। भारत के सड़क मंत्रालय ने इसमें  पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बिहार में तीन स्थानों पर ये तंत्र प्रयोग के तौर   स्थापित किया है।इसके तहत एक व्यवस्था होगी कि  जब वाहन वहां से गुजरेगा,तो उसका डाटा उस मशीन में  उपलब्ध होगा। जैसे वाहन वहां से जायेगा,उसकी क्षमता,उस पर लदे माल का बोझ,क्षमता से अधिक बोझ की जानकारी सामने आ जायेगा।यदि वाहन निर्धारित क्षमता से ज्यादा बजन का माल ले जा रहा है,तो उसे बिना रोके या परेशान किया,सारा आवश्यक जुर्माना की सूचना वाहन के मालिक को चला जायेगा। ये बताया गया कि अगर वाहन मालिक ने जुर्माना नहीं भरा,तो उसके वाहन के लाइसेंस का नवीकरण नहीं होगा,उसके वाहन को सडकों पर चलने की अनुमति नहीं  दी जाएगी।

भारत के सड़क मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यदि ये प्रयोग सफल रहा,अन्य राज्यों में भी इसे स्थापित किया जायेगा।इस तकनीक से बिना विधि व्यवस्था की समस्या उत्पन्न किये,वाहनों लंबे समय तक जाँच करने और कानून का अनुपालन में कोई अड़चन नहीं आएगी। ओवरलोडिंग की समस्या को नियंत्रण करने के बाद राष्ट्रीय उच्च पथों और राजकीय सड़कों की देख भाल और सुरक्षा आसान होगी। 

कोर्ट में  राज्य सरकार की ओर से  महाधिवक्ता पीके शाही, अपर महाधिवक्ता  अंजनी कुमार व सरकारी अधिवक्ता आलोक कुमार राही ने पक्षों को प्रस्तुत किया।एनएचएआई की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के एन सिंह व याचिकाकर्ता की ओर से विकास कुमार है। इस मामलें पर अगली सुनवाई 12 मई,2026 को की जाएगी।