लालू के लाल ने दिखाया बड़ा दिल ! जेल में बंद फिल्म कलाकार राजपाल यादव 11 लाख रुपए की मदद करेंगे तेज प्रताप

तेज प्रताप ने लिखा- मैं और मेरा पूरा JJD (जन शक्ति जनता दल) परिवार, उनके शोकाकुल परिवार के साथ पूरी संवेदना और मजबूती से खड़ा है।

Tej Pratap Yadav/ Rajpal Yadav- फोटो : news4nation

Tej Pratap Yadav : जेल में बंद चल रहे फिल्म कलाकार राजपाल यादव के लिए मसीहा बनकर तेज प्रताप यादव ने 11 लाख रुपए मदद देने की घोषणा की है. राजपाल यादव के चेक बाउंस मामले में सरेंडर के बाद   तेज प्रताप यादव यादव ने आर्थिक मदद का एलान किया है. बता दें कि राजपाल यादव पर 9 करोड़ रुपये का बकाया है, जो उन्होंने एक फिल्म के लिए उधार लिए थे. उनपर बकाया राशि न चुका पाने को लेकर मुकदमा चल रहा था, जिसमें राजपाल यादव को सजा भी सुनाई गई थी.


इसी मामले में राजपाल के लिए बड़ा दिल दिखाते हुए तेज प्रताप यादव ने अपने सोशल मीडिया पर लिखा - 'मुझे अभी मेरे बड़े भाई राव इंदरजीत यादव जी की पोस्ट के माध्यम से माननीय राजपाल यादव जी के परिवार की पीड़ा के विषय में जानकारी प्राप्त हुई। इस अत्यंत कठिन समय में मैं और मेरा पूरा JJD (जन शक्ति जनता दल) परिवार, उनके शोकाकुल परिवार के साथ पूरी संवेदना और मजबूती से खड़ा है। मानवीय करुणा एवं सहयोग की भावना से, मैं JJD परिवार की ओर से ₹11,00,000 (ग्यारह लाख रुपये) की आर्थिक सहायता उनके परिवार को प्रदान कर रहा हूँ।' 


क्या है पूरा मामला?

दरअसल, राजपाल यादव की कानूनी परेशानियों की शुरुआत साल 2010 में हुई थी, जब उन्होंने अपनी डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म 'अता पता लापता' (2012) के लिए दिल्ली स्थित मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से ₹5 करोड़ का लोन लिया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही, जिसके चलते भुगतान नहीं हो सका और मामला कोर्ट तक पहुंच गया। अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया। 


6 महीने की जेल की सजा

शिकायतकर्ता को दिए गए सात चेक बाउंस होने के बाद एक्टर को छह महीने की साधारण जेल की सजा सुनाई गई, जिसे 2019 की शुरुआत में सेशन कोर्ट ने भी बरकरार रखा। इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट में रिवीजन पिटीशन दायर की गई, लेकिन समय के साथ उनकी मुश्किलें बढ़ती चली गईं। जून 2024 में कोर्ट ने सजा को अस्थायी रूप से सस्पेंड करते हुए बकाया रकम चुकाने के लिए “ईमानदारी और ठोस कदम” उठाने का निर्देश दिया, जो बढ़कर लगभग ₹9 करोड़ तक पहुंच चुकी थी। हालांकि लगातार डेडलाइन मिस होने और वादे पूरे न होने के चलते कोर्ट का रुख सख्त होता गया।


बार-बार मोहलत मिलने के बावजूद भुगतान न करने पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया और 4 फरवरी 2026 को उनकी याचिका खारिज करते हुए उन्हें तिहाड़ जेल में सरेंडर करने का आदेश दिया।