Tej Pratap Yadav: सियासत के बाद शिवभक्ति, तेज प्रताप यादव बने संत, डिजिटल दरबार में हर-हर महादेव का उद्घोष

Tej Pratap Yadav: बिहार की राजनीतिक फिज़ा में इन दिनों एक नई तस्वीर सुर्ख़ियों में है। कभी सियासी तेवरों और तल्ख़ बयानों के लिए चर्चा में रहने वाले तेज प्रताप यादव अब शिवभक्ति के रंग में रंगे नजर आ रहे हैं।...

तेज प्रताप यादव बने संत- फोटो : X

Tej Pratap Yadav: बिहार की सियासत में अक्सर अपने तेवर और तर्ज़-ए-बयान से हलचल मचाने वाले तेज प्रताप यादव एक बार फिर सुर्खियों में हैं। मगर इस बार मुद्दा राजनीति की बाज़ीगरी नहीं, बल्कि उनका नया ‘संत अवतार’ है। राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे ने सोशल मीडिया पर ‘संत तेज प्रताप यादव’ के नाम से नया अकाउंट शुरू कर दिया है, जो 15 फरवरी से सक्रिय है।

डिजिटल मंच पर यह नई पारी किसी सियासी दांव से कम नहीं मानी जा रही। अब तक पांच वीडियो अपलोड हो चुके हैं, जिनमें वे भगवान शिव की भक्ति, साधना और आध्यात्मिक संदेश देते नजर आ रहे हैं। लाल वस्त्र, गले में रुद्राक्ष की माला और मुख से “हर हर महादेव” का उद्घोष  यह रूप उनके पारंपरिक राजनीतिक अंदाज़ से बिल्कुल जुदा है।

वीडियो में वे शिवभक्तों को नसीहत देते हैं कि रोज स्नान कर, मन को शांत रखकर और बिना किसी द्वेष के महादेव की आराधना करें। प्रेम-भाव से बेलपत्र अर्पित करने की ताकीद करते हुए वे कहते हैं, “मैं भी प्रतिदिन नहा-धोकर बेलपत्र चढ़ाता हूं। महादेव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय है, वे भक्तों के पास खिंचे चले आते हैं।” उनका पैगाम साफ है  भाईचारा, मोहब्बत और सकारात्मकता के साथ शिवभक्ति।

सियासी गलियारों में चर्चा है कि क्या यह आध्यात्मिक रंग भविष्य की रणनीति का हिस्सा है? याद दिला दें कि बिहार विधानसभा चुनाव में वे महुआ सीट से पराजित हुए थे। विधायकी जाने के बाद करीब तीन महीने पहले उन्होंने ब्लॉगिंग की दुनिया में कदम रखा और ‘TY VLOG’ नाम से नया यूट्यूब चैनल शुरू किया। महज कुछ महीनों में इसके 1.17 लाख सब्सक्राइबर हो चुके हैं।

पहले वीडियो में उन्होंने लिखा था, “जीवन में कुछ भी असंभव नहीं।” उसी फिलॉसफी के साथ अब वे कैमरे के सामने संत के स्वरूप में लौटे हैं। वीडियो के अंत में उन्होंने एलान किया कि लंबे अंतराल के बाद अपनी ब्लॉगिंग यात्रा को फिर से रिस्टार्ट कर रहे हैं और इंस्टाग्राम पर रोज नया वीडियो साझा करेंगे।अब सवाल यह है  क्या यह आध्यात्मिक अध्याय उनकी सियासी वापसी की प्रस्तावना है, या सचमुच एक नई राह की तलाश? बिहार की राजनीति इस नए रंग को गौर से देख रही है।