तेजस्वी ने राज्य के वित्तीय प्रबंधन के बहाने सीएम सम्राट पर बोला हमला, बिहार की एनडीए सरकार से इन सवालो का मांगा जवाब
बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने राज्य की एनडीए सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि अदूरदर्शी नीतियों और खराब बजटीय प्रबंधन के कारण प्रदेश वित्तीय कंगाली के कगार पर पहुंच गया है..
Patna : बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने राज्य की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए प्रदेश को वित्तीय कंगाली के कगार पर धकेलने का आरोप लगाया है। उन्होंने जारी बयान में कहा कि अदूरदर्शी नीतियों, घटते राजस्व, बढ़ते राजकोषीय घाटे और अत्यधिक कर्ज के बोझ के कारण बिहार में अराजक वित्तीय हालात पैदा हो गए हैं। नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि सरकार का बजटीय प्रबंधन पूरी तरह से चरमरा गया है, जिससे जनता के सामने गंभीर परिस्थितियां खड़ी हो गई हैं।
पेंशन जैसे रूटीन भुगतान के लिए आपातकालीन फंड के इस्तेमाल पर आपत्ति
तेजस्वी यादव ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के महज तीन महीने ही बीते हैं और सरकार को सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसे सामान्य व नियमित मासिक भुगतानों के लिए आकस्मिकता निधि (Contingency Fund) से ₹3,662 करोड़ की निकासी करनी पड़ रही है। संविधान के अनुच्छेद 267(2) का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि इस फंड का प्रावधान केवल 'अप्रत्याशित या आपातकालीन खर्चों' (Unforeseen Expenditure) के लिए है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो पेंशन दशकों से नियमित दी जा रही है, वह अचानक आकस्मिक खर्च कैसे बन गई और क्या सरकार हमारे बुजुर्गों व लाभार्थियों को आपदा मान रही है?
FRBM एक्ट के उल्लंघन और राजकोषीय घाटे पर उठाए सवाल
बयान में राज्य के राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को लेकर भी गहरी चिंता व्यक्त की गई है। नेता प्रतिपक्ष के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिहार का राजकोषीय घाटा बढ़कर 11.8% के चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है, जबकि राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम के तहत इसकी अधिकतम सीमा 3% तय है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का राजकोषीय घाटा निर्धारित लक्ष्य से तीन से पांच गुना अधिक होना वित्तीय अनुशासनहीनता का सबसे बड़ा प्रमाण है, जिसे सरकार पब्लिक डोमेन में स्वीकार करने से कतरा रही है।
राष्ट्रीय कोष से भी बड़ी आकस्मिकता निधि बनाने पर उठाए प्रशासनिक सवाल
हाल ही में सरकार द्वारा किए गए विधायी संशोधन पर आपत्ति जताते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि नए नियम के तहत बिहार की आकस्मिकता निधि का आकार कुल बजटीय व्यय के 10% (यानी करीब ₹32,492 करोड़) तक बढ़ाने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने इसकी तुलना देश की राष्ट्रीय आकस्मिकता निधि से करते हुए कहा कि इस समय भारत सरकार का आपातकालीन कोष ₹30,000 करोड़ का है, जबकि बिहार जैसे राज्य ने उससे भी बड़ा फंड अपने पास रखने की शक्ति हासिल कर ली है। उन्होंने इसे सदन को अंधेरे में रखकर मनमाने तरीके से खर्च करने और एक 'समानांतर बजट' चलाने की कोशिश करार दिया।
पारदर्शिता और विधायी निगरानी की मांग
अंत में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार पारदर्शिता और विधायिका की निगरानी होता है, लेकिन सरकार वास्तविक आर्थिक स्थिति को छिपाने के लिए भ्रामक प्रेस विज्ञप्तियां जारी कर रही है। उन्होंने सरकार से सार्वजनिक रूप से स्पष्टता की मांग करते हुए पूछा कि यदि सामान्य और रूटीन खर्चों के लिए ही आपातकालीन कोष का सहारा लिया जा रहा है, तो राज्य की बड़ी विकास परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे के कार्यों के लिए धनराशि कहां से आएगी? उन्होंने सरकार को चेतावनी भरे लहजे में इन तथ्यात्मक और तर्कपूर्ण सवालों का सीधा जवाब देने को कहा है।
रंजन की रिपोर्ट