तेजस्वी हुए 'तन्हा', तेज प्रताप के संग खड़ा कुनबा: मकर संक्रांति पर राजद के दो भाइयों की अलग-अलग कहानी
मकर संक्रांति के पावन अवसर पर पटना की गलियां तिलकुट की खुशबू और दही-चूड़ा भोज की सियासत से सराबोर रहीं। इस बार सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र राजद सुप्रीमो लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव का आवास रहा। तेज प्रताप ने एक भव्य भोज का आयोजन किया, जिसमें सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक के दिग्गज नेताओं का जमावड़ा लगा। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान की मौजूदगी और एनडीए के कई मंत्रियों के पहुंचने से इस आयोजन ने न केवल सामाजिक बल्कि बड़े राजनीतिक संदेश भी दिए। तेज प्रताप खुद अतिथियों की मेजबानी में सक्रिय दिखे, जिससे पटना की सियासी धुरी उनके इर्द-गिर्द घूमती नजर आई।
लालू यादव की मौजूदगी और 'सब ठीक है' का संदेश
पिछले कुछ समय से परिवार में चल रही खींचतान की अटकलों के बीच, लालू प्रसाद यादव का तेज प्रताप के आवास पर पहुंचना सबसे बड़ी खबर रही। काले चश्मे में मुस्कुराते हुए पहुंचे लालू यादव ने मीडिया से बातचीत में साफ तौर पर कहा कि "परिवार में सब ठीक है।" उन्होंने दही-चूड़ा भोज को बिहार की संस्कृति और मेल-मिलाप का प्रतीक बताया। लालू यादव की इस मौजूदगी ने उन तमाम कयासों पर विराम लगा दिया, जिनमें पिता-पुत्र के बीच दूरियों की बात कही जा रही थी। तेज प्रताप के लिए यह क्षण भावनात्मक और राजनीतिक, दोनों लिहाज से बड़ी जीत माना जा रहा है।
तेजस्वी की दूरी और 'छोटे भाई' का इंतजार
एक तरफ जहां तेज प्रताप के घर उत्सव का माहौल था, वहीं नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का अंदाज कुछ अलग नजर आया। महीनों बाद पटना लौटे तेजस्वी अपनी मां राबड़ी देवी के साथ अकेले मकर संक्रांति मनाते दिखे। उनके आवास या राजद कार्यालय में वैसी हलचल नहीं दिखी जैसी तेज प्रताप के यहाँ थी। हालांकि, तेजस्वी ने सोशल मीडिया (X) पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। बड़े भाई तेज प्रताप ने मीडिया के सवालों पर चुटकी लेते हुए कहा कि "तेजस्वी मेरा छोटा भाई है, वह थोड़ा देर से सोकर उठता है, वह भी जल्द ही आशीर्वाद लेने पहुंचेगा।"
भोज की थाली से 'खेला' होने के संकेत
इस दही-चूड़ा भोज ने बिहार में किसी बड़े राजनीतिक उलटफेर यानी 'खेला' की चर्चाओं को फिर से हवा दे दी है। भाजपा के भोज में कांग्रेस सांसदों की मौजूदगी और तेज प्रताप के यहाँ विरोधी दल के नेताओं के पहुंचने ने सियासी गलियारों में बेचैनी बढ़ा दी है। भाजपा नेता विजय सिन्हा का यह बयान कि वे "किसी व्यक्ति से नफरत नहीं करते" और कांग्रेस नेताओं का "इंतजार कीजिए, कुछ बड़ा होगा" कहना, संकेत दे रहा है कि मकर संक्रांति के बाद बिहार की राजनीति में कोई नई खिचड़ी पक सकती है। फिलहाल, तेज प्रताप के इस दांव ने उन्हें बिहार की राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है।