आपातकाल लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय, सत्ता बचाने के लिए कांग्रेस ने कुचली थी संविधान की आत्मा: विजय कुमार सिन्हा

बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने 'संविधान हत्या दिवस' पर कांग्रेस को घेरते हुए 25 जून 1975 को देश का सबसे काला दिन करार दिया है।कहा कि तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए देश के संविधान की आत्मा को कुचल दिया था...

आपातकाल लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय : विजय कुमार सिन्हा- फोटो : वंदना शर्मा

Patna : बिहार के कृषि मंत्री व पूर्व उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने 'संविधान हत्या दिवस' के अवसर पर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने 25 जून 1975 को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे कलंकित दिन बताते हुए कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए देश के संविधान की आत्मा को कुचल दिया था। विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि आज जो लोग संविधान बचाने का ढोंग कर रहे हैं, उनकी पार्टी ने 21 महीनों तक देश को जेलखाना बनाकर रख दिया था। उन्होंने आपातकाल के खिलाफ लड़ने वाले लोकतंत्र सेनानियों को नमन करते हुए संकल्प दोहराया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार देश में दोबारा ऐसा काला अध्याय कभी नहीं आने देगी।


अर्धरात्रि में सोई जनता सुबह उठी तो छिन चुके थे सारे मौलिक अधिकार : विजय कुमार सिन्हा

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने आपातकाल के उस भयावह दौर को याद करते हुए कहा कि आज से करीब 51 वर्ष पूर्व देश की जनता रात को सामान्य रूप से सोई थी, लेकिन जब अर्धरात्रि के बाद सुबह आंख खुली तो पता चला कि लोकतंत्र की हत्या की जा चुकी है। विपक्ष के तमाम बड़े नेताओं को सलाखों के पीछे डाल दिया गया था, पत्रकारों की कलम पर ताला जड़ दिया गया और आम जनता के सभी मौलिक अधिकार क्रूरतापूर्वक छीन लिए गए थे। उन्होंने सवालिया लहजे में पूछा कि यदि यह सब संविधान की सरेआम हत्या नहीं थी, तो और क्या था?


तानाशाही के खिलाफ बिहार से उठी थी 'संपूर्ण क्रांति' की गूंज, जेपी ने बदला इतिहास

श्री सिन्हा ने गौरव के साथ उल्लेख किया कि इस दमनकारी तानाशाही के खिलाफ देश में सबसे मजबूत और पहली आवाज बिहार की पावन धरती से ही बुलंद हुई थी। लोकनायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) के ऐतिहासिक नेतृत्व में बिहार से शुरू हुई 'संपूर्ण क्रांति' की गूंज ने पूरे देश के युवाओं, छात्रों और प्रबुद्ध नागरिकों को एक मंच पर एकजुट कर दिया। बिहार की इसी क्रांतिकारी परंपरा के कारण देश की सजग जनता ने आगे बढ़कर लोकतंत्र की रक्षा की और अंततः तानाशाही ताकतों को उखाड़ फेंकने का काम किया।


अनुच्छेद 352 का घोर दुरुपयोग, कांग्रेस को देश की जनता को देना होगा जवाब

कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि जो दल आज हाथ में संविधान लेकर घूमने का नाटक करता है, उसी के शासनकाल में संविधान के अनुच्छेद 352 का घोर दुरुपयोग किया गया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री ने केवल अपनी राजनीतिक सत्ता और कुर्सी की रक्षा के लिए समूचे देश को 21 महीनों तक बंधक बना दिया था। लोकतांत्रिक संस्थाओं को पंगु बनाकर संविधान की मूल भावना पर सीधा प्रहार किया गया, जिसके लिए कांग्रेस को आज नहीं तो कल देश की जनता के सामने जवाब देना ही होगा।


यातनाएं सहकर भी न झुकने वाले मीसा बंदियों और लोकतंत्र सेनानियों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि

आपातकाल के दौरान जेलों में बंद रहे राष्ट्रभक्तों को याद करते हुए विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि उस दमनकारी दौर में जिन लोकतंत्र सेनानियों और मीसा (MISA) बंदियों ने बर्बर यातनाएं सहकर भी तानाशाही के आगे झुकने से साफ इनकार कर दिया, आज पूरा देश उनका ऋणी है। उन्होंने इन वीर सेनानियों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका यह सर्वोच्च बलिदान व्यर्थ नहीं गया; बल्कि उनके इसी कड़े संघर्ष ने भारतीय लोकतंत्र को एक नई ऊर्जा, मजबूती और नई दिशा देने का काम किया।


पीएम मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार संविधान के मूल आदर्शों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध

अंत में कृषि मंत्री ने पार्टी और सरकार का संकल्प व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी और एनडीए की सरकार यह पूरी तरह सुनिश्चित करेगी कि इतिहास का ऐसा काला अध्याय देश में फिर कभी न दोहराया जा सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्तमान सरकार संविधान की मूल भावना— न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व के प्रति पूरी तरह समर्पित है। उन्होंने कहा कि 25 जून का यह दिन राजनीतिक लाभ का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का संकल्प बार-बार दोहराने का दिन है।

वंदना की रिपोर्ट