UIDAI का नया फरमान- आधार ट्रांजैक्शन पर सरकार की पैनी नजर! अब हर ट्रांजैक्शन आईडी में लगेगा 'स्पेशल कोड', धांधली करने वालों की खैर नहीं

UIDAI के नवीनतम सर्कुलर के आलोक में अब केंद्र और राज्य सरकार की सभी योजनाओं के ऑथेंटिकेशन ट्रांजैक्शन आईडी में एक 'यूनिक आइडेंटिफायर' जोड़ना अनिवार्य कर दिया गया है । इससे डिजीटल लेनदेन में पारदर्शिता होगी।

Patna - आधार आधारित ऑथेंटिकेशन ट्रांजैक्शन की सुरक्षा और पारदर्शिता को बढ़ाने के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने एक महत्वपूर्ण सर्कुलर जारी किया है । इस नए निर्देश के तहत अब केंद्र और राज्य सरकार की सभी संस्थाओं को अपने हर ट्रांजैक्शन आईडी (Transaction ID) के अंत में एक 'यूनिक आइडेंटिफायर' (Unique Identifier) जोड़ना अनिवार्य होगा । यह विशिष्ट पहचान कोड अधिकतम पांच अक्षरों का होगा, जो संबंधित योजना या विभाग के नाम को दर्शाएगा 

UIDAI ने पाया कि कई सरकारी विभाग एक ही एयूए (AUA) या केयूए (KUA) कोड का उपयोग करके कई अलग-अलग योजनाओं का संचालन कर रहे हैं । इससे ऑडिटिंग, धोखाधड़ी की पहचान और अलग-अलग योजनाओं के प्रदर्शन पर नज़र रखने में तकनीकी चुनौतियाँ आ रही थीं । एक ही कोड होने के कारण किसी एक योजना में तकनीकी खराबी आने पर दूसरी सेवाएं भी प्रभावित हो जाती थीं, जिसे अब इस नई व्यवस्था से सुधारा जा सकेगा । 

इस नई व्यवस्था के लागू होने से डेटा विश्लेषण और योजनाओं के लाभ का आकलन करना आसान हो जाएगा । यह सुनिश्चित करेगा कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल स्वीकृत उद्देश्यों के लिए ही दिया जा रहा है और ट्रांजैक्शन की पूरी ट्रैसेबिलिटी (Traceability) बनी रहे । साथ ही, यह आधार अधिनियम, 2016 के तहत सुरक्षा अनुपालन को और अधिक मजबूत करेगा 

सर्कुलर में उन छोटी संस्थाओं के लिए 'लाइट' (LITE) कोड का भी प्रावधान किया गया है, जिनके ट्रांजैक्शन साल भर में एक लाख से कम होते हैं । ऐसी संस्थाओं को कोई लाइसेंस शुल्क नहीं देना होगा और न ही उन पर ऑडिट की बाध्यता होगी, बशर्ते वे निर्धारित नियमों का पालन करें । हालांकि, यदि ट्रांजैक्शन की संख्या निर्धारित सीमा से अधिक होती है, तो संबंधित संस्था पर जुर्माना और लाइसेंस शुल्क लगाया जाएगा 

UIDAI ने सभी संबंधित विभागों और मंत्रालयों को निर्देश दिया है कि वे 30 दिनों के भीतर अपनी तकनीकी प्रणालियों में बदलाव करें और लागू किए गए 'यूनिक आइडेंटिफायर्स' का विवरण साझा करें । बिहार सरकार के वित्त विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग ने भी इस संबंध में सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र जारी कर दिया है । यह कदम डिजिटल गवर्नेंस में जवाबदेही तय करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।