अंबेडकर जयंती समारोह में बोले केन्द्रीय मंत्री मांझी, शिक्षा में समानता और राजनीतिक भागीदारी से ही खुलेगा विकास का ताला”

Bihar News : हम पार्टी की ओर से पटना में संविधान निर्माता बाबा साहेब की जयंती पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने बाबा साहेब के विचारों पर प्रकाश डाला..

Patna : राजधानी पटना के श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल, गांधी मैदान में संविधान निर्माता भीम राव अम्बेडकर की जयंती के अवसर पर हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (से.) द्वारा भव्य समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार सुमन ने की, जबकि उद्घाटनकर्ता के रूप में वरिष्ठ नेता जीतन राम मांझी उपस्थित रहे।


अपने उद्घाटन संबोधन में केन्द्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने बाबा साहब के विचारों को केंद्र में रखते हुए कहा कि शिक्षा ही वह सबसे बड़ा माध्यम है, जो समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी आगे बढ़ने का अवसर देता है। उन्होंने कहा कि जब तक समाज के हर वर्ग को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध नहीं होगी, तब तक सामाजिक न्याय की अवधारणा अधूरी रहेगी।


श्री मांझी ने दलित एवं वंचित समाज से आह्वान किया कि वे आपसी भेदभाव, ऊँच-नीच और छुआछूत जैसी कुरीतियों को समाप्त कर एकजुटता की ताकत को मजबूत करें। उन्होंने कहा कि समाज के भीतर की दरारें ही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बनती हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि बाबा साहब ने जो अधिकार दिलाए, उन्हें बचाए रखने और आगे बढ़ाने के लिए समाज को राजनीतिक रूप से जागरूक और सक्रिय रहना होगा।


उन्होंने कहा, “सामाजिक न्याय केवल भाषणों से नहीं, बल्कि जमीन पर बराबरी और सम्मान सुनिश्चित करने से स्थापित होता है।” उन्होंने बाबा साहब के विचार “विकास एक ताला है और राजनीति उसकी चाबी है” को दोहराते हुए कहा कि जब तक वंचित समाज राजनीति में अपनी प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित नहीं करेगा, तब तक उसके अधिकार पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो पाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि समाज को शिक्षा, संगठन और संघर्ष के मार्ग पर चलकर अपने अधिकारों की रक्षा करनी होगी और नई पीढ़ी को भी इसके प्रति जागरूक करना होगा।



श्री मांझी ने कहा कि कांशी राम जी बाबा साहेब के बड़े अनुयायी थे और वह हमेशा कहा करते थें कि राष्ट्रपति का बेटा हो या भंगी की संतान सबको मिले शिक्षा एक समान।बाबा साहब ने भी अपनी पुस्तक हूँ वेयर शुद्र में कहा है कि शुद्र वह है जो शिक्षा से वंचित है।आज निःसंदेह हमारा समाज धीरे-धीरे शिक्षा की तरफ़ जुड़ रहा है पर समाज में जबतक समान शिक्षा व्यवस्था लागू नहीं होगी तबतक हमें बराबरी का हक नहीं मिल सकता और उसके लिए हम सबों को एकजुट होने की आवश्यकता है।


वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. संतोष कुमार सुमन ने अपने विस्तृत संबोधन में कहा कि शिक्षा में असमानता ही समाज में व्याप्त असमानता की सबसे बड़ी जड़ है। उन्होंने कहा कि जब तक गरीब, दलित, पिछड़े और वंचित वर्गों को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिलेगी, तब तक सामाजिक न्याय केवल नारा बनकर रह जाएगा। उन्होंने कहा कि अधिकार बिना संघर्ष के नहीं मिलते, इसलिए समाज को लोकतांत्रिक तरीके से संगठित होकर अपने अधिकारों के लिए आगे आना होगा।


डॉ. सुमन ने दलित समाज के भीतर मौजूद आंतरिक विभाजन पर चिंता जताते हुए एकजुटता का आह्वान किया और कहा कि छोटी-छोटी सामाजिक दीवारों को तोड़कर ही मजबूत समाज का निर्माण संभव है। उन्होंने छुआछूत को मानवता के खिलाफ अपराध बताते हुए इसे समाप्त करने के लिए व्यापक सामाजिक जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता पर बल दिया।


वहीं डॉ. संतोष कुमार सुमन ने इस अवसर पर बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि वे राज्य के प्रत्येक जिले का दौरा करेंगे और सीधे दलितों, गरीबों एवं वंचित समाज के बीच जाकर उनकी समस्याओं को सुनेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी द्वारा “गरीब चौपाल” का आयोजन किया जाएगा, जिसके माध्यम से आम लोगों की समस्याओं का तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।


उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल घोषणा नहीं, बल्कि एक जमीनी अभियान होगा, जिसके जरिए अंतिम पायदान के व्यक्ति तक न्याय और समाधान पहुंचाया जाएगा।


पटना से वंदना