सिक्किम कैडर के जांबाज अधिकारी:नीट छात्रा मामले में जॉइंट डायरेक्टर राजीव रंजन ने संभाली कमान, फॉरेंसिक साक्ष्यों पर जोर

कौन हैं IPS राजीव रंजन?चारा घोटाले से लेकर शारदा चिटफंड तक, बड़े-बड़े मामलों की सुलझाई है गुत्थी अब नीट छात्रा की मौत मामले में जांच कि कमान इनको सौपी गई है.

सिक्किम कैडर के जांबाज अधिकारी:नीट छात्रा मामले में जॉइंट डायरेक्टर राजीव रंजन ने संभाली कमान- फोटो : news 4 nation

बिहार के जहानाबाद में नीट छात्रा के साथ हुए कथित दुष्कर्म और हत्या के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। राज्य सरकार की सिफारिश के बाद 12 फरवरी को सीबीआई (CBI) ने इस केस की कमान अपने हाथों में ली। इस संवेदनशील जांच का नेतृत्व वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राजीव रंजन कर रहे हैं, जिन्होंने हाल ही में अपनी टीम के साथ पीड़िता के घर का दौरा कर परिजनों से लंबी पूछताछ की है।

कौन हैं जांच अधिकारी राजीव रंजन?

रोहतास जिले के मूल निवासी और 2005 बैच के आईपीएस अधिकारी राजीव रंजन वर्तमान में सीबीआई में जॉइंट डायरेक्टर (बिहार-झारखंड) के पद पर तैनात हैं। उनके पास जांच का लंबा अनुभव है और वे इससे पहले कोलकाता व भुवनेश्वर की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा में काम कर चुके हैं। विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें 2025 में राष्ट्रपति पुलिस पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है।

हाई-प्रोफाइल मामलों का अनुभव

राजीव रंजन का नाम कई बड़े मामलों से जुड़ा रहा है। उन्होंने चारा घोटाले की जांच में अहम भूमिका निभाई थी, जिसमें लालू यादव को सजा हुई। इसके अलावा, वे आईआरसीटीसी (IRCTC), लैंड-फॉर-जॉब्स और पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित शारदा चिटफंड घोटाले की जांच का भी नेतृत्व कर चुके हैं। झारखंड के साहिबगंज में अवैध खनन के खुलासे में भी उनकी बड़ी भूमिका रही है।

शुरुआती जांच और फॉरेंसिक साक्ष्य

इस मामले में राज्य की एसआईटी (SIT) की जांच पर सवाल उठे थे, क्योंकि शुरुआती दावों में यौन हमले से इनकार किया गया था। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने हमले की पुष्टि की और फॉरेंसिक जांच में अहम साक्ष्य भी मिले। अब तक कई संदिग्धों के डीएनए (DNA) सैंपल लिए गए हैं, लेकिन फिलहाल किसी से मिलान न होने के कारण अपराधी की पहचान एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

परिजनों से पूछताछ और सबूतों का संकलन

15 फरवरी को अपनी पहली यात्रा के दौरान सीबीआई की टीम ने मृतका के माता-पिता और भाई से अलग-अलग कमरे में पूछताछ की। टीम ने छात्रा की किताबें, कपड़े और अन्य व्यक्तिगत सामान फॉरेंसिक जांच के लिए जब्त किए हैं। साथ ही, परिजनों के खराब मोबाइल फोन को ठीक कराकर जमा करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि डिजिटल फुटप्रिंट्स की जांच की जा सके।

जांच की भविष्य की दिशा

सीबीआई की प्राथमिकता अब घटनाक्रम का नए सिरे से पुनर्निर्माण (Reconstruction) करना और फॉरेंसिक सबूतों का सत्यापन करना है। इससे पहले भी शिल्पी-गौतम और ब्रह्मेश्वर मुखिया जैसे पेचीदा मामले सीबीआई को सौंपे गए हैं। अब देखना यह है कि राजीव रंजन के नेतृत्व में एजेंसी इस गुत्थी को कितनी जल्दी सुलझाकर पीड़ित परिवार को न्याय दिला पाती है।