तेजस्वी को 'अपनों' ने दिया घाव: ढाका से मनिहारी तक बगावत की इनसाइड स्टोरी, क्या दिल्ली से सेट हुआ था गेम?

ढाका, वाल्मीकिनगर, फारबिसगंज और मनिहारी के विधायकों ने तेजस्वी यादव को क्यों दिया झटका? जानें आनंद मोहन और नीतीश कुमार से जुड़े वो समीकरण जिन्होंने बदल दिया गेम।

Patna - : बिहार विधानसभा में शक्ति परीक्षण और सियासी उठापटक के बीच आरजेडी और कांग्रेस के चार विधायकों के रुख ने महागठबंधन के समीकरणों को ध्वस्त कर दिया है। फैसल रहमान, सुरेंद्र कुशवाहा, मनोज विश्वास और मनोहर सिंह—ये वो नाम हैं जिन्होंने तेजस्वी यादव की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। इनके इस कदम के पीछे कहीं पुराने गुरुओं का ऋण है, तो कहीं भविष्य की बिसात।

फैसल रहमान और आनंद मोहन का 'कनेक्शन'

ढाका से महज 178 वोटों से जीतने वाले आरजेडी विधायक फैसल रहमान के पाला बदलने के पीछे आनंद मोहन की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 2020 चुनाव में आनंद मोहन ने बीजेपी उम्मीदवार पवन जायसवाल के लिए प्रचार न कर फैसल को वॉकओवर दिया था। जनवरी में आनंद मोहन के दही-चूड़ा भोज में फैसल की मौजूदगी ने पहले ही संकेत दे दिए थे। क्या यह भविष्य में शिवहर के समीकरणों को साधने की कोई डील है?

सुरेंद्र कुशवाहा: गुरुभक्ति या सियासी मजबूरी?

वाल्मीकिनगर से कांग्रेस विधायक सुरेंद्र कुशवाहा का झुकाव चौंकाने वाला नहीं है। उनके राजनीतिक गुरु उपेंद्र कुशवाहा हैं। 2015 में उपेंद्र की पार्टी से चुनाव लड़ने वाले सुरेंद्र को कांग्रेस का टिकट भी 'खास' पैरवी पर मिला था। जब गुरु सत्ता की दूसरी तरफ हों, तो चेले का डगमगाना बिहार की राजनीति में पुरानी परंपरा रही है।

मनोज विश्वास: AIMIM का अहसान और 'बैक चैनल' गेम

फारबिसगंज विधायक मनोज विश्वास की कहानी थोड़ी पेचीदा है। उनकी जीत में एआईएमआईएम (AIMIM) द्वारा उम्मीदवार न उतारने की बड़ी भूमिका थी। 27 फरवरी को अख्तरुल इमान को 'थैंक्यू' कहने वाले मनोज विश्वास का अचानक गायब होना इशारा करता है कि कांग्रेस आलाकमान के नाम पर कहीं दिल्ली से ही 'बैक चैनल' के जरिए कोई बड़ा खेल तो नहीं रचा गया?

मनोहर सिंह: नीतीश कुमार की पुरानी पसंद

मनिहारी के विधायक मनोहर सिंह मूल रूप से जेडीयू की उपज रहे हैं। 2010 में जेडीयू के टिकट पर जीतने वाले मनोहर को 2015 में नीतीश कुमार के कहने पर ही कांग्रेस से टिकट मिला था। ऐसे में जब नीतीश कुमार ने पाला बदला, तो मनोहर सिंह का उनके साथ खिंचा चला जाना अस्वाभाविक नहीं था।

निष्कर्ष: सेटिंग बिहार में हुई या दिल्ली में?

इन चारों विधायकों की बगावत में एक बात सामान्य है—इनका मूल जुड़ाव या तो नीतीश कुमार से रहा है या उनके सहयोगियों से। जानकार मानते हैं कि इस 'परफेक्शन' के साथ अंजाम दिए गए ऑपरेशन की पटकथा बिहार में नहीं, बल्कि दिल्ली के पावर सेंटर्स में लिखी गई थी।

Report - Narrottam kumar