Bihar News : पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कहा गोदनामे की रजिस्ट्री तिथि के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति खारिज करना गलत
Bihar News : पटना हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल गोदनामे की रजिस्ट्री तिथि के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति का आवेदन खारिज करना पूरी तरह से गलत है......पढ़िए आगे
PATNA : पटना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि केवल गोदनामे की रजिस्ट्री तिथि के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति की याचिका खारिज करना सरासर गलत है। जस्टिस कुमार मनीष की पीठ ने बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी (NBPDCL) के उस रवैये पर कड़ा प्रहार किया, जिसके तहत मृतक महिला कर्मचारी के गोद लिए बेटे की अनुकंपा नियुक्ति को खारिज कर दिया गया था।
ये मामला बेगूसराय के विजय कुमार साह को उनकी नानी (दिवंगत रेशमा देवी, जो बिजली विभाग में मेसेंजर थीं) ने गोद लिया था। 1999 में नानी और जैविक माता-पिता की सहमति के बाद एफिडेविट के जरिए गोद लेने की प्रक्रिया शुरू हुई और 2001 में रजिस्ट्री हुई। वर्ष 2007 में सेवाकाल के दौरान कर्मचारी की मृत्यु के बाद विजय ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन दिया।विभाग ने यह कहते हुए अर्जी खारिज कर दी कि गोदनामे की रजिस्ट्री के वक्त याचिकाकर्ता की उम्र 15 वर्ष से अधिक थी।
आवेदन 5 साल की तय समय सीमा के बाद जमा किया गया। उत्तराधिकार प्रमाणपत्र केवल सेवानिवृत्ति लाभों के लिए था। अदालत ने कड़ा रुख और टिप्पणी की। हाईकोर्ट ने तकनीकी आड़ में राहत रोकने वाले विभाग के दोहरे रवैये को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि गोद लेने की प्रक्रिया 1999 के हलफनामे से शुरू हो चुकी थी, तब विजय की उम्र 15 वर्ष से कम थी। सरकारी सुस्ती का हर्जाना नागरिक क्यों भरे? 2010 से ही आवेदक अधिकारियों के चक्कर काट रहा था।विभाग ने ही बार-बार नए प्रमाणपत्रों की मांग करके देरी कराई।
कोर्ट ने कहा कि जब उसी गोदनामे से पीएफ, ग्रेच्युटी और पेंशन दे दी गई, तो नौकरी देने के वक्त उसी रिश्ते को नकारना पूरी तरह अनुचित है। कोर्ट ने खारिज करने वाले आदेश (22.12.2017) को रद्द करते हुए विभाग को 3 महीने के भीतर याचिकाकर्ता को गोद लिया कानूनी पुत्र मानकर अनुकंपा नियुक्ति पर विचार करने का सख्त निर्देश दिया है।