Bihar Student Success Story: घड़ी बनाने वाले का बेटा बना बिहार का हीरो, दिन में नौकरी, रात में पढ़ाई, परीक्षा में टॉप कर लक्की ने सपनों को बना दिया हकीकत

Bihar Student Success Story: हौसले बुलंद हों तो तंगहाली भी रास्ता नहीं रोक पाती ये जज़्बा एक बार फिर बिहार के पूर्णिया जिले के होनहार बेटे लक्की अंसारी ने साबित कर दिया।

फुटपाथ से फतेह तक- फोटो : social Media

Bihar Student Success Story:  हौसले अगर बुलंद हों, तो मुफ़लिसी की जंजीरें भी टूट जाती हैं। बिहार के पूर्णिया से आई यह दास्तान किसी अफ़साने से कम नहीं, बल्कि हक़ीक़त की वो रोशनी है जो दिलों को रौशन कर देती है। लक्की अंसारी एक ऐसा नाम, जिसने अपनी मेहनत, जज़्बे और सब्र से साबित कर दिया कि तालीम के रास्ते में गरीबी भी सिर झुका देती है।

खजांची हाट के एक छोटे से कमरे में रहने वाला यह नौजवान, हालात की गर्दिशों में पला-बढ़ा, मगर उसके ख़्वाब हमेशा आसमान छूते रहे। पिता मो. इम्तियाज, जो सड़क किनारे फुटपाथ पर घड़ियाँ ठीक करते हैं, और माँ पम्मी बेगम, जो स्कूल में खाना बनाकर घर चलाने में हाथ बंटाती हैं इन दोनों की कुर्बानियों ने लक्की के इरादों को और मजबूत कर दिया। जब घर में तंगी का साया गहराता, तब भी इनकी उम्मीदों का चराग़ बुझने नहीं दिया गया।

लक्की ने न सिर्फ पढ़ाई को अपना मक़सद बनाया, बल्कि हालात से समझौता करने के बजाय उनसे लड़ना सीखा। यूट्यूब के सहारे रोज़ाना 6 से 7 घंटे की मेहनत, और साथ ही मेडिकल शॉप में काम ये उसकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया। थकान के बावजूद रात की तन्हाई में किताबों से उसकी दोस्ती जारी रहती। उसकी आँखों में नींद कम और ख्वाब ज़्यादा होते थे।

478 अंक यानी 95.60 प्रतिशत हासिल कर बिहार में दूसरा स्थान पाना कोई मामूली बात नहीं। यह उस जद्दोजहद की जीत है, जो हर रोज़ उसके दिल में चलती थी। लक्की का कहना है कि अगर नौकरी न करनी पड़ती, तो शायद वह टॉपर बनता मगर उसकी यह बात भी उसकी विनम्रता और सच्चाई का आईना है।

आज जब उसकी कामयाबी की ख़बर पूरे इलाके में गूंज रही है, तो हर शख्स की ज़ुबान पर बस एक ही दुआ है ऐसे बेटे हर घर में पैदा हों। लक्की का सपना है एक शिक्षक बनकर समाज को रोशनी देना, ताकि कोई और बच्चा मुफ़लिसी के अंधेरे में अपना रास्ता न खोए।वाकई, यह कहानी सिर्फ कामयाबी की नहीं, बल्कि उम्मीद, हिम्मत और इंसानी जज़्बे की जीत की कहानी है।