Bihar News : NSUI ने पीएम मोदी के जन्मदिन पर मनाया राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस, कलेक्ट्रेट के सामने तले पकौड़े, की बूट पॉलिश

Bihar News : एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने पीएम मोदी के जन्मदिन को 'राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस' के रूप में मनाते हुए कलेक्ट्रेट के सामने स्टॉल लगाकर प्रतीकात्मक रूप से पकौड़े तले.....पढ़िए आगे

राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस - फोटो : SOCIAL MEDIA

SAMASTIPUR : बिहार के समस्तीपुर जिले में गुरुवार को छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) के कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने इस दिन को 'राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस' के रूप में मनाते हुए कलेक्ट्रेट के सामने स्टॉल लगाकर प्रतीकात्मक रूप से पकौड़े तले, चाय बेची और बूट पॉलिश करके केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया। इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष राजन कुमार वर्मा ने किया।

कार्यक्रम में विशेष रूप से शामिल हुए कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष अबू तमीम ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि आज देश में बेरोजगारी चरम सीमा पर पहुंच चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने हर साल एक करोड़ युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन आज भी करोड़ों युवा रोजगार की तलाश में दर-दर भटकने को मजबूर हैं। इसके साथ ही उन्होंने बिहार में बाढ़ से प्रभावित लोगों को पर्याप्त राहत सामग्री न मिलने का मुद्दा उठाते हुए सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।

एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष राजन कुमार वर्मा ने कहा कि एक तरफ जहां सत्ताधारी दल द्वारा प्रधानमंत्री के जन्मदिन को 'सेवा दिवस' के रूप में धूमधाम से मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ देश की बड़ी युवा आबादी बेरोजगारी के दंश से जूझ रही है। उन्होंने बताया कि सरकार का ध्यान युवाओं की ज्वलंत समस्याओं और बाढ़ पीड़ितों की बदहाली की ओर खींचने के लिए कलेक्ट्रेट परिसर के सामने बूट पॉलिश करने, पकौड़े तलने के साथ-साथ बेरोजगारों और पीड़ितों के नाम दीये भी जलाए गए।

इस विरोध प्रदर्शन में एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष अभिनव अंशु, एखलाकुर रहमान, नवनीत कुमार सहित बड़ी संख्या में छात्र एवं कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित नहीं करती और जनसमस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकालती, तो छात्र संगठन आगे भी इस तरह के जन-आंदोलन चलाने के लिए बाध्य होगा।