MP के रीवा से 1350 KM की दूरी 20 घंटे में तय! समस्तीपुर में पकड़ा गया फर्जी परमिट का खेल, मोटर व्यवसायी संघ ने खोला मोर्चा

समस्तीपुर जिले में एक ही खनन परमिट का उपयोग कर 2-3 बार गिट्टी ढोने का मामला सामने आया है। मध्य प्रदेश से 1350 किमी की दूरी 20 घंटे में तय करने वाले फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए जिला मोटर व्यवसायी संघ ने खनन पदाधिकारी से जांच की मांग की है।

समस्तीपुर में पकड़ा गया फर्जी परमिट का खेल, मोटर व्यवसायी संघ ने खोला मोर्चा- फोटो : Reporter

बिहार के समस्तीपुर जिले में दूसरे राज्यों से आने वाले ट्रकों द्वारा एक ही परिवहन परमिट का उपयोग कर बार-बार गिट्टी ढोने का बड़ा मामला सामने आया है। इस अवैध परिवहन के खिलाफ जिला मोटर व्यवसायी संघ ने मोर्चा खोलते हुए जिला खनन पदाधिकारी को पत्र लिखकर तुरंत कार्रवाई और सघन जांच की मांग की है। संघ का आरोप है कि इस खेल से सरकार को भारी राजस्व की हानि हो रही है और स्थानीय ट्रक व्यवसायियों का रोजगार पूरी तरह प्रभावित हो रहा है।


रीवा से बंगाल तक फैला जाल, एक ही चालान पर 2-3 बार परिवहन

संघ के अनुसार मध्य प्रदेश के रीवा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के रामपुरहाट से गिट्टी लादकर आने वाले ट्रक समस्तीपुर के अलग-अलग इलाकों में माल खाली कर रहे हैं। ये ट्रक एक ही वैध परमिट का उपयोग दो से तीन बार अवैध ढुलाई के लिए कर रहे हैं। बाहरी राज्यों के ट्रकों द्वारा नियम-कायदों को ताक पर रखकर इस तरह के फर्जीवाड़े को अंजाम दिया जा रहा है।


1350 KM की दूरी मात्र 20 घंटे में! असंभव दावे से खुला फर्जीवाड़ा 

अवैध परिवहन का यह खेल बीते 4 अक्टूबर को समस्तीपुर के टारा में तब पकड़ा गया जब ट्रक संख्या NL06AA/1569 को गिट्टी खाली करते देखा गया। जांच में पता चला कि इस ट्रक का परमिट रीवा (MP) से 3 अक्टूबर की सुबह 10:34 बजे मधुबनी के लिए बना था। कागजों के मुताबिक ट्रक ने 1350 किलोमीटर की दूरी महज 20 घंटे में तय कर ली, जो व्यावहारिक रूप से पूरी तरह असंभव है और परमिट के गलत इस्तेमाल को दर्शाता है।


जीपीएस ट्रैकिंग और बिहार खनन जीपीएस अनिवार्य करने की मांग

संघ ने जिला खनन पदाधिकारी से मांग की है कि मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों से आने वाले सभी ट्रकों की जीपीएस (GPS) लोकेशन ट्रैक कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही बिहार में प्रवेश करने वाले बाहरी ट्रकों में 'बिहार खनन जीपीएस' अनिवार्य करने का सुझाव दिया गया है ताकि अवैध ढुलाई पर स्थायी रूप से रोक लगाई जा सके।

धीरज पाराशर की रिपोर्ट