Aurangabad Art Festival: औरंगाबाद में सजा कला का मंच, बिहार के कई जिलों के कलाकारों ने दी शानदार प्रस्तुति

Aurangabad Art Festival: औरंगाबाद के लॉर्ड बुद्धा पब्लिक स्कूल में कला महोत्सव आयोजित हुआ। इसमें बिहार के कई जिलों के कलाकारों ने संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियां दीं। आयोजन का उद्देश्य स्थानीय कलाकारों को मंच देना है।

Aurangabad Art Festival

Aurangabad Art Festival: औरंगाबाद शहर के लॉर्ड बुद्धा पब्लिक स्कूल में कला महोत्सव का आयोजन किया गया। इसमें औरंगाबाद सहित बिहार के कई जिलों से आए कलाकारों ने हिस्सा लिया। कलाकारों ने संगीत और नृत्य की शानदार प्रस्तुतियां देकर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। गायकों ने अपनी सुरीली आवाज से लोगों का मनोरंजन किया, वहीं नृत्य कलाकारों ने भी मनमोहक प्रस्तुतियां दीं।


स्थानीय कलाकारों को मंच देना है महोत्सव का उद्देश्य


कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए लॉर्ड बुद्धा पब्लिक स्कूल के डायरेक्टर धनंजय सिंह ने बताया कि औरंगाबाद में कला महोत्सव की परंपरा वर्ष 1992 से चली आ रही है। पहले इस आयोजन में स्थानीय कलाकारों को प्राथमिकता दी जाती थी और उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए मंच मिलता था।


धनंजय सिंह के अनुसार, महोत्सव के सरकारी आयोजन में बदलने के बाद स्थानीय कलाकारों को पहले की तरह अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। इससे जिले के कई प्रतिभाशाली कलाकारों को अपनी कला निखारने का मौका नहीं मिलता और उनकी प्रतिभा गांवों तक ही सीमित रह जाती है।


उन्होंने कहा कि इसी समस्या को देखते हुए निजी स्तर पर कला महोत्सव आयोजित किया गया है। इसका उद्देश्य शहर और गांवों के कलाकारों को मंच देना है, ताकि वे अपनी प्रतिभा को बड़े स्तर पर पहचान दिला सकें। उन्होंने यह भी बताया कि अगले साल इस आयोजन को और बड़े पैमाने पर करने की योजना है।


प्रखंड स्तर से जिला और फिर राज्य स्तर तक होगी प्रतियोगिता


कार्यक्रम के आयोजक सिद्धार्थ विद्यार्थी ने बताया कि महोत्सव का मुख्य उद्देश्य स्थानीय कलाकारों को बढ़ावा देना है। उन्होंने जिला प्रशासन पर स्थानीय कला और कलाकारों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। सिद्धार्थ विद्यार्थी के मुताबिक, औरंगाबाद में बिहार के अन्य जिलों की तुलना में अधिक महोत्सव आयोजित होते हैं, लेकिन सरकारी आयोजन शुरू होने के बाद स्थानीय कलाकारों को पर्याप्त मंच नहीं मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बाहर से कम अनुभव वाले कलाकारों को भी अधिक भुगतान देकर बुलाया जाता है, जबकि जिले के कलाकारों को मौका नहीं दिया जाता।


उन्होंने बताया कि निजी सहयोग से आयोजित इस महोत्सव में पहले प्रखंड स्तर पर प्रतियोगिता कराई जाती है। वहां से चुने गए कलाकार जिला स्तर पर मुकाबले में हिस्सा लेते हैं। प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने वाले गायकों को 'सुर सम्राट' की उपाधि दी जाती है, जबकि नृत्य में विजेता कलाकारों को सम्मानित किया जाता है। आयोजक ने बताया कि इस आयोजन की अगली कड़ी राज्य स्तर पर पटना में आयोजित की जाएगी। इसमें बिहार के अलग-अलग जिलों के कलाकार हिस्सा लेंगे। हालांकि, कार्यक्रम की तारीख अभी तय नहीं हुई है। जल्द ही इसकी घोषणा की जाएगी।

औरंगाबाद बिहार से दीनानाथ मौआर की रिपोर्ट