बिहार में 1 सितंबर से 'चिकित्सा आपके द्वार': घर-घर जाकर होगी मुफ्त स्वास्थ्य जांच

राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा 1 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक 'जांच एवं उपचार चिकित्साआपके द्वार' अभियान की शुरुआत की जा रही है। इस अभियान के तहत स्वास्थ्य टीमें घर-घर जाकर बीपी, शुगर और कैंसर जैसे गैर-संचारी रोगों की मुफ्त जांच करेंगी।

बिहार में 1 सितंबर से 'चिकित्सा आपके द्वार- फोटो : Reporter

बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ और पारदर्शी बनाने के लिए राज्य स्वास्थ्य समिति 1 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक राज्यव्यापी 'जांच एवं उपचार चिकित्सा आपके द्वार' अभियान चलाने जा रही है। छपरा में जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस 3 महीने के विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक पहुंचकर लोगों की गंभीर बीमारियों की शुरुआती अवस्था में पहचान करना और समय पर उनका मुफ्त इलाज सुनिश्चित करना है।


गैर-संचारी रोगों से बचाव पर विशेष जोर

सारण के जिला गैर-संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. भूपेंद्र कुमार ने बताया कि वर्तमान में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, तीन प्रमुख कैंसर (मुंह, स्तन व गर्भाशय का कैंसर), हृदय रोग, फैटी लीवर और सांस की गंभीर बीमारियां बड़ी चुनौती बन चुकी हैं। शुरुआती पहचान न होने से कई बार मरीजों की स्थिति जानलेवा हो जाती है। यह अभियान इन बीमारियों के जोखिम कारकों की समय पर पहचान कर असामयिक मौतों को रोकने में एक मजबूत कवच के रूप में काम करेगा।

त्रि-स्तरीय सर्वे और स्क्रीनिंग की व्यवस्था

अभियान को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने विस्तृत रूपरेखा तैयार की है। आशा कार्यकर्ता और एएनएम घर-घर जाकर 'फैमिली फोल्डर' भरेंगी तथा सी-बैन (CBAC) फॉर्म के जरिए जोखिम वाले व्यक्तियों की पहचान करेंगी। आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर तैनात सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) 30 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी व्यक्तियों का बीएमआई (BMI) मापेंगे और एनसीडी (NCD) ऐप के माध्यम से पेंडिंग लिस्ट की स्क्रीनिंग पूरी करेंगे।

मुफ्त जांच, परामर्श और विशेषज्ञ डॉक्टर की सुविधा

सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी के अनुसार, केवल बीमारी की पहचान ही नहीं बल्कि संदिग्ध मरीजों के मुफ्त लैब टेस्ट की भी व्यवस्था है। इसमें ब्लड शुगर, HbA1c, लिपिड प्रोफाइल, लीवर व किडनी फंक्शन टेस्ट, ईसीजी, थायराइड, बायोप्सी और पैप स्मीयर जैसी जांचें शामिल हैं। गंभीर मरीजों को उच्चतर अस्पतालों के लिए रेफर किया जाएगा और टेली-कंसल्टेशन के माध्यम से सीधे विशेषज्ञ डॉक्टरों का परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा।

जिला स्तर पर सख्त मॉनिटरिंग और जवाबदेही तय

राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पाण्डेय के निर्देशानुसार, अभियान की दैनिक मॉनिटरिंग के लिए जिला से लेकर प्रखंड स्तर तक के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर दी गई है। आयुष चिकित्सक, बीएचएम, बीसीएम, एमओआईसी और डीपीएम रोजाना की गतिविधियों की समीक्षा करेंगे। इसके साथ ही सिविल सर्जन खुद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से रोजाना प्रगति की सतत निगरानी करेंगे ताकि किसी भी कमी को तुरंत दूर किया जा सके।

सारण से धर्मेन्द्र रस्तोगी की रिपोर्ट