Bihar LPG Gas Crisis: गैस संकट की आहट, गांवों में गोइठा प्लान तैयार, मिडिल ईस्ट जंग के साये में देसी चूल्हे की वापसी

Bihar LPG Gas Crisis:रसोई का चूल्हा किसी भी हालत में ठंडा न पड़े, इसके लिए गांव की महिलाएं देसी जुगाड़ के साथ मैदान में उतर आई हैं।...

गांवों में गोइठा प्लान तैयार- फोटो : reporter

Bihar LPG Gas Crisis: मिडिल ईस्ट के देशों में जंग जैसे हालात की खबरों के बीच भारत की रसोई व्यवस्था को लेकर भी हलचल तेज हो गई है। सरकार भले ही बार-बार अफवाहों से बचने और गैस की आपूर्ति सामान्य होने की बात कह रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ग्रामीण इलाकों में लोग अपने पुराने और भरोसेमंद बैकअप प्लान को फिर से मजबूत करने में जुट गए हैं। रसोई का चूल्हा किसी भी हालत में ठंडा न पड़े, इसके लिए गांव की महिलाएं देसी जुगाड़ के साथ मैदान में उतर आई हैं।

कटिहार जिले के गौशाला हवाई अड्डा इलाके की तस्वीर इन दिनों खास चर्चा में है। यहां बड़ी संख्या में महिलाएं पहले की तरह गोबर से गोइठा (उपला) तैयार कर रही हैं। दरअसल गैस संकट की आशंका और बाजार में उठती अफवाहों के बीच गांव की महिलाओं ने पहले से ही अपना ‘देसी इंतजाम’ पक्का करना शुरू कर दिया है। उनका साफ कहना है कि चाहे हालात जैसे भी हों, गांव की रसोई का चूल्हा बुझने नहीं देंगे।

स्थानीय महिलाओं का कहना है कि वे वर्षों से गोबर के गोइठे बनाती आ रही हैं। पहले यह सिर्फ घरेलू इस्तेमाल के लिए होता था, लेकिन अब अगर गैस की किल्लत बढ़ती है या बाजार में मांग बढ़ती है तो इसे बेचकर आमदनी का जरिया भी बनाया जा सकता है। उनका कहना है कि इस इलाके में इतनी मात्रा में गोइठा तैयार होता है कि जरूरत पड़ने पर कई घरों की रसोई इसी से चल सकती है।

ग्रामीण महिलाओं की यह तैयारी बताती है कि गांव की जिंदगी में परंपरागत संसाधन अभी भी कितने मजबूत हैं। जहां शहरों में गैस सिलेंडर के लिए लंबी लाइनें और अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिलता है, वहीं गांवों में लोग अपने पुराने चूल्हा-चक्की सिस्टम पर भरोसा जताते नजर आ रहे हैं।

गांव की बुजुर्ग महिलाओं का कहना है कि पहले के समय में पूरा घर इसी गोइठे और लकड़ी के चूल्हे पर चलता था। इसलिए अगर कभी गैस की दिक्कत भी हो जाए तो उन्हें ज्यादा परेशानी नहीं होगी। उनका कहना है कि “हमारे यहां चूल्हा कभी ठंडा नहीं पड़ता, गैस हो या न हो।”

मिडिल ईस्ट के हालात और गैस आपूर्ति को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच ग्रामीण भारत की यह बैकअप तैयारी एक अलग ही कहानी बयां कर रही है जहां आधुनिक रसोई के साथ-साथ देसी चूल्हा भी आज भी पूरी मजबूती से खड़ा है।

रिपोर्ट- श्याम कुमार सिंह