पीएचईडी कार्यालय में शराब पीने की हुई पुष्टि, कोर्ट ने इतने दिनों के लिए भेजा जेल, शेखपुरा में वायरल वीडियो में बड़ी कार्रवाई

उत्पाद विभाग की टीम ने मौके पर ब्रेथ एनालाइजर से उनकी जांच की, जिसमें शराब सेवन की पुष्टि होने की बात सामने आई। इसके बाद उन्हें सदर अस्पताल ले जाकर चिकित्सीय जांच सहित आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी कराई गईं।

Sheikhpura PHED office alcohol case- फोटो : news4nation

Bihar News :  शेखपुरा के सरकारी कार्यालय में शराब पीकर हंगामा और गाली-गलौज करने के आरोप में उत्पाद विभाग की टीम ने पीएचईडी के प्रधान लिपिक अभिमन्यु पांडे को गिरफ्तार किया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर की गई कार्रवाई के बाद आरोपी प्रधान लिपिक को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।


जानकारी के अनुसार, जिलाधिकारी को शिकायत मिली थी कि शेखपुरा स्थित लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) कार्यालय में प्रधान लिपिक अभिमन्यु पांडे कथित रूप से शराब के नशे में हंगामा कर रहे हैं। शिकायत के आधार पर जिलाधिकारी के निर्देश पर उत्पाद विभाग की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सहायक अवर निरीक्षक अमरजीत कुमार एवं दिनेश कुमार के नेतृत्व में विशेष पुलिस बल के साथ कार्यालय पहुंचकर प्रधान लिपिक को पकड़ लिया।


उत्पाद विभाग की टीम ने मौके पर ब्रेथ एनालाइजर से उनकी जांच की, जिसमें शराब सेवन की पुष्टि होने की बात सामने आई। इसके बाद उन्हें सदर अस्पताल ले जाकर चिकित्सीय जांच सहित आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी कराई गईं। बाद में उन्हें उत्पाद मामलों के विशेष न्यायाधीश सतीश कुमार झा के न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।


उत्पाद थाना अध्यक्ष अमित आनंद के अनुसार, गिरफ्तार प्रधान लिपिक का पूर्व में भी शराब सेवन से संबंधित मामला सामने आ चुका है। विभागीय रिकॉर्ड के मुताबिक पिछले वर्ष शराब सेवन के मामले में दोषी पाए जाने के बाद उन्होंने न्यायालय में जुर्माना जमा किया था और इसके बाद उन्हें मुक्त किया गया था।


गिरफ्तारी के दौरान कार्यालय परिसर में कथित रूप से हंगामा और अभद्र भाषा के इस्तेमाल का वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में प्रधान लिपिक द्वारा कुछ लोगों को संबोधित करते हुए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किए जाने की बात कही जा रही है।


सरकारी कार्यालय के भीतर शराब सेवन के आरोप में प्रधान लिपिक की गिरफ्तारी की खबर सामने आने के बाद जिले के प्रशासनिक महकमे में भी चर्चा तेज हो गई है। खासकर ऐसे समय में जब बिहार में सरकारी कर्मचारियों से शराब का सेवन नहीं करने को लेकर शपथ पत्र लिए जाने और नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है।


अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि सरकारी कर्मचारी कार्यालय में शराब का सेवन करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसके विरुद्ध विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई की जाएगी। मामला न्यायालय में पहुंचने के साथ ही विभागीय कार्रवाई को लेकर भी लोगों की नजरें टिकी हैं।