चेयरमैन और ईओ के खिलाफ 9 वार्ड पार्षदों का अनिश्चितकालीन धरना शुरू, योजनाओं में मनमानी समेत धांधली के लगाए कई आरोप

शेखपुरा जिले के चेवाड़ा नगर पंचायत के कुल 10 में से 9 वार्ड पार्षदों ने चेयरमैन और ईओ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वार्ड पार्षदों ने दोनो अधिकारियों पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं......

चेयरमैन और ईओ के खिलाफ 9 वार्ड पार्षदों ने खोला मोर्चा- फोटो : उमेश

Sheikhpura : जिले के चेवाड़ा नगर पंचायत में विकास योजनाओं और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर घमासान छिड़ गया है। नगर पंचायत के कुल 10 में से 9 वार्ड पार्षदों ने चेयरमैन और कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) के कथित मनमाने रवैये के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार से पार्षदों ने नगर पंचायत कार्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। धरना दे रहे पार्षदों का आरोप है कि विकास योजनाओं के चयन से लेकर सरकारी योजनाओं के वितरण तक में भारी अनियमितता बरती जा रही है, और जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।


निजी पेट्रोल पंप पर चापाकल लगाने और आवास योजना में अवैध वसूली का आरोप

पार्षदों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना में पारदर्शिता पूरी तरह खत्म हो चुकी है। वास्तविक गरीब और जरूरतमंदों को दरकिनार कर चेयरमैन के चहेतों को लाभ पहुंचाया जा रहा है और योजना के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है। पेयजल संकट के बीच पार्षदों ने आरोप लगाया कि चेयरमैन लट्टू यादव के निजी पेट्रोल पंप परिसर में सरकारी चापाकल गाड़ दिया गया है, जो सरकारी संसाधनों के घोर दुरुपयोग का मामला है।


CCTV, डस्टबिन और वाहनों की खरीदारी में पारदर्शिता पर उठाए सवाल

नगर पंचायत में विभागीय स्तर पर की गई खरीदारी पर भी पार्षदों ने धांधली के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सीसीटीवी कैमरे, डस्टबिन, कचरा पोशाक और कचरा वाहनों की खरीद में व्यापक पैमाने पर अनियमितता हुई है। पार्षदों ने खरीद से संबंधित टेंडर, बिल और भुगतान के सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की है। इसके अलावा जल-जीवन-हरियाली योजना में भी केवल कागजी खानापूर्ति करने का आरोप लगाया गया है।


सफाई के नाम पर प्रतिमाह 14 लाख खर्चफिर भी सड़कों पर गंदगी

सफाई व्यवस्था की बदहाली पर नाराजगी जताते हुए पार्षदों ने कहा कि नगर पंचायत में सफाई के नाम पर हर महीने करीब ₹14 लाख रुपये का बजट खर्च किया जा रहा है। इसके बावजूद 10 वार्डों में महज 25 सफाईकर्मी ही कार्यरत हैं, जिन्हें मात्र ₹8,000 प्रति माह वेतन दिया जाता है। भारी बजट के बाद भी कई इलाकों में नियमित सफाई नहीं हो रही है।


जिलाधिकारी से शिकायत के बाद भी कार्रवाई न होने पर चेतावनी

वार्ड पार्षदों का कहना है कि इन तमाम अनियमितताओं के संबंध में जिलाधिकारी से लिखित शिकायत की गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। पार्षदों ने स्पष्ट किया कि उनका यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के लिए है। जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक उनका शांतिपूर्ण धरना जारी रहेगा।


उमेश की रिपोर्ट