Bihar SHO Suspended:दुष्कर्म मामले में लापरवाही के इल्ज़ाम में करंडे थानाध्यक्ष सस्पेंड, रेप के आरोपी ने कोर्ट में किया सरेंडर, पुलिस पर गिरी गाज

मामले में कथित लापरवाही बरतने के आरोप में करंडे थानाध्यक्ष राकेश कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

लापरवाही के इल्ज़ाम में करंडे थानाध्यक्ष सस्पेंड- फोटो : reporter

Bihar SHO Suspended: शेखपुरा के  दुष्कर्म मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। स्नातक की छात्रा से कथित दुष्कर्म के आरोपी अजय यादव उर्फ गोरका ने पुलिस की गिरफ्त से पहले ही सोमवार को शेखपुरा व्यवहार न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। कोर्ट में सरेंडर के बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। वहीं, मामले में कथित लापरवाही बरतने के आरोप में करंडे थानाध्यक्ष राकेश कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।वहीं, सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करंडे थानाध्यक्ष राकेश कुमार पर हुई है। ग्रामीणों की शिकायत थी कि घटना वाले दिन पीड़िता और उसके परिजन सबसे पहले करंडे थाना पहुंचे थे, लेकिन वहां उनकी प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई और न ही आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी के लिए प्रभावी कदम उठाए गए। शिकायत की जांच के बाद आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए, जिसके बाद पुलिस अधीक्षक ने थानाध्यक्ष को निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए।

आरोपी के अदालत में सरेंडर करने की खबर फैलते ही पीड़िता के गांव के बड़ी संख्या में ग्रामीण पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंच गए। ग्रामीणों ने पुलिस पर गंभीर इल्ज़ाम लगाते हुए कहा कि समय रहते गिरफ्तारी नहीं होने की वजह से आरोपी अदालत पहुंचने में कामयाब हो गया। लोगों ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए। पुलिस अधीक्षक हिमांशु ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि पूरे मामले में कानून के मुताबिक कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मामला 7 जुलाई का बताया जा रहा है। आरोप है कि स्नातक की छात्रा हथियावां कॉलेज से परीक्षा देकर साइकिल से अपने घर लौट रही थी। इसी दौरान जयनगर गांव के पास केवाली गांव निवासी अजय यादव उर्फ गोरका ने कथित तौर पर छात्रा को रोककर उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद महिला थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई और पुलिस ने जांच शुरू की। इस मामले ने पूरे जिले में व्यापक चर्चा और आक्रोश पैदा किया।

आरोपी के आत्मसमर्पण के बाद महिला थाना में आयोजित प्रेस वार्ता में एसडीपीओ डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था। एसआईटी ने आरोपी की तलाश में जिले के अलावा अन्य जिलों और दूसरे राज्यों तक लगातार दबिश दी। पुलिस ने आरोपी की बहन के घर से उसका मोबाइल फोन भी बरामद किया है।

एसडीपीओ का कहना है कि पुलिस की लगातार छापेमारी और दबाव के कारण ही आरोपी ने अदालत में आत्मसमर्पण किया। उन्होंने बताया कि अब आरोपी को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी और सात दिनों के भीतर न्यायालय में चार्जशीट दाखिल करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही स्पीडी ट्रायल के जरिए तीन महीने के भीतर सज़ा दिलाने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि, अंतिम फैसला न्यायालय में उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।इस मामले में पुलिस अधीक्षक ने एसआईटी में शामिल अधिकारियों और कर्मियों को उनके प्रयासों के लिए पुरस्कृत करने की भी घोषणा की है।

यह मामला एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि यौन अपराध जैसे गंभीर मामलों में शुरुआती पुलिस कार्रवाई कितनी अहम होती है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही होती है, तो उसका असर न केवल जांच पर पड़ता है, बल्कि पीड़ित का कानून और व्यवस्था पर भरोसा भी कमजोर होता है। अब पूरे मामले में निगाहें पुलिस की आगे की जांच और न्यायालय की कार्रवाई पर टिकी हैं।

रिपोर्ट- उमेश कुमार