Bihar Dam Project: शिवहर में मानसून से पहले बड़ी तैयारी, डैम प्रोजेक्ट से बाढ़ पर लगेगा ब्रेक, मुजफ्फरपुर -पूर्वी चंपारण को भी होगा फायदा

Bihar Dam Project: हर साल नेपाल से आने वाली नदियों के उफान से तबाही झेलने वाले इस क्षेत्र में अब बाढ़ और कटाव से निजात दिलाने के लिए सरकार का महत्वाकांक्षी डैम प्रोजेक्ट अंतिम चरण में पहुंच चुका है।

मानसून से पहले बड़ी तैयारी,- फोटो : reporter

Bihar Dam Project:  शिवहर और आसपास के इलाकों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। हर साल नेपाल से आने वाली नदियों के उफान से तबाही झेलने वाले इस क्षेत्र में अब बाढ़ और कटाव से निजात दिलाने के लिए सरकार का महत्वाकांक्षी डैम प्रोजेक्ट अंतिम चरण में पहुंच चुका है।बेलवा क्षेत्र में बागमती नदी के किनारे बन रहा यह डैम लगभग पूरा हो चुका है। योजना के तहत बागमती नदी की पुरानी धारा की उड़ाही और लिंक चैनल निर्माण का काम तेज़ी से जारी है, जिसे इस महीने के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद अगले महीने से डैम से नियंत्रित पानी का प्रवाह शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। जिलाधिकारी प्रतिभा रानी के सतत प्रयास और निगरानी के बाद इस साल के मानसून के दौरान जिले वासियों को बाढ़ और कटाव से राहत मिल जाएगी।

जिलाधिकारी प्रतिभा रानी  के अनुसार, डैम का फाटक खोलने के बाद नदी का पानी पुरानी धारा में नियंत्रित रूप से बहने लगेगा, जिससे बाढ़ की तीव्रता में भारी कमी आने की उम्मीद है। साथ ही जलस्तर को नियंत्रित कर कटाव की समस्या पर भी प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।

इस पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी जिला प्रशासन द्वारा लगातार की जा रही है। डीएम प्रतिभा रानी का दावा है कि इस मानसून में जिले के लोगों को बाढ़ की पुरानी तबाही से काफी हद तक राहत मिल सकती है। यह योजना केवल शिवहर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव आसपास के जिलों पर भी पड़ेगा। बागमती नदी के पानी को नियंत्रित तरीके से आगे बढ़ाकर गंडक नदी से जोड़ने की योजना पर काम हो रहा है, जिससे जल प्रबंधन को नया रूप मिलेगा।

मुजफ्फरपुर और पूर्वी चंपारण जैसे जिलों में भी इस परियोजना से लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। योजना के तहत कई जगहों पर स्लूइस गेट (नियंत्रण द्वार) बनाए जा रहे हैं, जिससे जरूरत के अनुसार पानी को रोका या छोड़ा जा सकेगा। किसानों के लिए यह प्रोजेक्ट किसी राहत पैकेज से कम नहीं माना जा रहा है। जहां एक तरफ बाढ़ और कटाव से फसलें हर साल बर्बाद होती थीं, वहीं अब नियंत्रित जल प्रवाह से सिंचाई की सुविधा भी बेहतर होगी। इससे कृषि उत्पादन बढ़ने की संभावना है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत वर्ष 2020 में तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा की गई थी, जिसे अब जाकर अंतिम रूप दिया जा रहा है। स्थानीय लोगों में इस योजना को लेकर उत्साह है और लोग इसे बाढ़ से स्थायी समाधान की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं।हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि परियोजना की सफलता इसके सही संचालन और नियमित रखरखाव पर निर्भर करेगी। यदि योजना पूरी तरह प्रभावी साबित होती है, तो यह बिहार में बाढ़ प्रबंधन के लिए एक मॉडल प्रोजेक्ट बन सकती है।

शिवहर से मनोज कुमार सिंह की रिपोर्ट