बिहार में साइबर अपराध पर पुलिस का बड़ा एक्शन, 2026 में 1.14 लाख से अधिक शिकायतें, 104 करोड़ लुटने से बचे

बिहार पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और नई तकनीक के जरिए वित्तीय धोखाधड़ी, डीपफेक, सोशल मीडिया अपराध तथा क्रिप्टो फ्रॉड जैसे मामलों पर तेजी से कार्रवाई की जा रही है।

Bihar Cyber Police
Bihar Cyber Police - फोटो : news4nation

 Bihar News : पटना स्थित बिहार पुलिस की साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई (CCSU) ने साइबर अपराध पर नियंत्रण पाने में बड़ी सफलता पाई है। वर्ष 2026 (जनवरी से जुलाई) के आंकड़ों के अनुसार राज्य में वित्तीय साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी 1,14,918 शिकायतें राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज हुई हैं। इन मामलों में 104.05 करोड़ रुपये की राशि होल्ड कराई गई है, जबकि होल्ड प्रतिशत बढ़कर 29.52 फीसदी पहुंच गया है। इसी अवधि में सोशल मीडिया और अन्य साइबर अपराधों से संबंधित 13,642 शिकायतें भी दर्ज की गईं। वहीं साइबर हेल्पलाइन पर 1,77,910 कॉल का जवाब दिया गया।


सैकड़ों एफआईआर, 552 गिरफ्तारियां

जनवरी से जून 2026 के बीच साइबर अपराध के मामलों में 2,942 एफआईआर दर्ज की गईं, जबकि 552 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इसी अवधि में पीड़ितों को 9.99 करोड़ रुपये की राशि वापस कराई गई। साइबर इंटेलिजेंस टीम ने जनवरी से जुलाई 2026 के बीच साइबर अपराध में इस्तेमाल हो रहे 6,399 मोबाइल नंबर और 1,876 IMEI नंबर ब्लॉक कराए। पुलिस का मानना है कि इससे साइबर अपराधियों के नेटवर्क पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिली है।


'साइबर प्रहार' बना बड़ा हथियार 

साइबर अपराधियों के बैंक खातों पर कार्रवाई के लिए चलाए जा रहे साइबर प्रहार अभियान के तहत अब तक हजारों संदिग्ध म्यूल अकाउंट चिन्हित किए गए हैं। वहीं Cyber Prahar 2.0 में 1,215 म्यूल अकाउंट, 112 एफआईआर और 89 गिरफ्तारियां, Cyber Prahar 3.0 में 536 म्यूल अकाउंट, 143 एफआईआर और 99 गिरफ्तारियां और Cyber Prahar 4.0 (जुलाई 2026 तक) में 3,177 म्यूल अकाउंट चिन्हित किए गए, जिनमें 5 एफआईआर दर्ज कर 5 गिरफ्तारियां की गईं।


फर्जी दस्तावेजों पर भी कार्रवाई

Cyber Prahar 3.0 के तहत 815 संदिग्ध दस्तावेज चिन्हित किए गए। इनमें से 416 दस्तावेजों का सत्यापन किया गया। जांच के आधार पर 44 एफआईआर दर्ज की गईं और 71 लोगों को गिरफ्तार किया गया।


डीपफेक और क्रिप्टो मामलों की भी जांच

डिजिटल इन्वेस्टिगेशन लैब ने अब तक 72 मोबाइल फोन, 9 हार्ड डिस्क और 9 लैपटॉप से डेटा एक्सट्रैक्शन किया है। इसके अलावा 14 डीपफेक फोटो और वीडियो की पहचान की गई है। वहीं 6 क्रिप्टोकरेंसी मामलों की जांच विशेष तकनीकी उपकरणों की मदद से की जा रही है।


बिहार पुलिस ने राज्य में साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नए सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर और अत्याधुनिक जांच उपकरणों की खरीद की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही राज्यभर में सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर (SOC) की स्थापना और जिला स्तर पर साइबर थानों को आधुनिक संसाधनों से लैस करने की योजना पर भी काम चल रहा है। बिहार पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और नई तकनीक के जरिए वित्तीय धोखाधड़ी, डीपफेक, सोशल मीडिया अपराध तथा क्रिप्टो फ्रॉड जैसे मामलों पर तेजी से कार्रवाई की जा रही है।