घंटे भर प्रतिनियुक्त पुलिस का इंतजार करते रहे उपनगर आयुक्त; एक दरोगा और दो सिपाहियों के भरोसे चला अभियान, नहीं हटी अवैध पार्किंग
Sitamarhi : जिला प्रशासन द्वारा सदर अस्पताल के मुख्य द्वारों के समीप से अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए चलाया गया अभियान भारी कुप्रबंधन की भेंट चढ़ गया। दंडाधिकारी (मजिस्ट्रेट) की मौजूदगी के बावजूद पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती न होने के कारण यह पूरी कार्रवाई महज खानापूर्ति बनकर रह गई। लंबे समय से अतिक्रमण और ट्रैफिक जाम की गंभीर समस्या झेल रहे अस्पताल मार्ग को खाली कराने का प्रशासनिक दावा पहले ही दिन बेअसर नजर आया।
घंटों इंतजार के बाद एक दरोगा और दो सिपाहियों के भरोसे उतरी टीम
अतिक्रमण हटाओ ड्राइव का नेतृत्व कर रहे उपनगर आयुक्त कुलदीप सिन्हा दोपहर 2 बजे से ही प्रतिनियुक्त पुलिस बल की तैनाती के लिए लगातार फोन के माध्यम से वरीय अधिकारियों से गुहार लगाते रहे। लगभग एक घंटे से अधिक समय तक पुलिस बल का इंतजार करने के बाद, अभियान शुरू होने के आधे घंटे बाद नगर थाने की गश्ती टीम मौके पर पहुँची। आखिरकार, पूरे अभियान की कमान महज एक दरोगा और दो सिपाहियों के हवाले ही छोड़ दी गई।
वरीय प्रभारियों और थानाध्यक्ष की गैरमौजूदगी पर उठे सवाल
कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों के बीच समन्वय का भारी अभाव स्पष्ट रूप से देखने को मिला। विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बनाए गए वरीय प्रभारी अधिकारी पूरे अभियान से पूरी तरह नदारद रहे। वहीं, नगर थानाध्यक्ष की अनुपस्थिति में टीम ने जल्दबाजी में औपचारिक रूप से अस्पताल के तीनों गेटों के आसपास से अस्थायी दुकानों को हटाकर अपना कर्तव्य पूरा कर लिया, जिससे कार्रवाई का कोई व्यापक असर नहीं दिखा।
यातायात और परिवहन विभाग की अनुपस्थिति से बनी रही जाम की समस्या
सदर अस्पताल जाने वाले मुख्य मार्ग पर सड़क के दोनों किनारों पर अनियंत्रित और अवैध ढंग से वाहनों की पार्किंग जस की तस बनी रही। यातायात एवं परिवहन विभाग की गैरमौजूदगी इस अभियान की विफलता का सबसे बड़ा कारण बनी। अधिकारियों द्वारा अवैध पार्किंग पर कोई ठोस कदम न उठाए जाने के कारण पूरे दिन सदर अस्पताल रोड भीषण जाम की गिरफ्त में रहा, जिससे गंभीर मरीजों और एम्बुलेंस की आवाजाही प्रभावित हुई।
स्थायी समाधान के बजाय दिखावे की कार्रवाई से लोगों में नाराजगी
अस्पताल जैसे अति-संवेदनशील इलाके में अधिकारियों के इस तरह के सतही रवैये से स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों में भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि जब तक नगर निगम, पुलिस प्रशासन और यातायात विभाग संयुक्त रूप से सख्त कदम नहीं उठाएंगे, तब तक समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि खानापूर्ति के बजाय नियमित और ठोस रणनीति बनाकर अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
अविनाश की रिपोर्ट