डाक विभाग की लापरवाही पर स्थायी लोक अदालत सख्त, सहरसा डाक अधीक्षक से 15 दिनों में मांगा जवाब

स्थायी लोक अदालत (लोक उपयोगी सेवाएं), सुपौल ने डाक विभाग के ढुलमुल रवैये और जवाब पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने सहरसा प्रमंडल के डाक अधीक्षक से 15 दिनों के भीतर अभिलेखीय साक्ष्यों के साथ विस्तृत स्पष्टीकरण पेश करने का आदेश दिया है...

डाक विभाग की लापरवाही पर स्थायी लोक अदालत सख्त- फोटो : विनय कुमार मिश्रा

Supaul : स्थायी लोक अदालत (लोक उपयोगी सेवाएं), सुपौल ने वाद संख्या 13/2026 में डाक विभाग के ढुलमुल रवैये और जवाब पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने सहरसा प्रमंडल के डाक अधीक्षक से 15 दिनों के भीतर अभिलेखीय साक्ष्यों के साथ विस्तृत स्पष्टीकरण पेश करने का आदेश दिया है। अदालत ने विभाग द्वारा पूर्व में दिए गए जवाब को प्रथम दृष्टया अतार्किक और गैर-कानूनी करार दिया है।


तकनीकी त्रुटि के नाम पर 11 वर्षों की देरी पर उठे सवाल

मामले की सुनवाई के दौरान वादी के खाते में प्रदर्शित राशि को लेकर डाक विभाग की बड़ी गड़बड़ी सामने आई। विभाग ने माना कि तकनीकी त्रुटि के कारण खाते में 19,084 रुपये दिखे थे, जिसे अदालत ने अपर्याप्त माना। अदालत ने पूछा कि यदि 2015 में यह गड़बड़ी हुई थी, तो 31 मार्च 2026 को खाते में 29,381 रुपये दिखने तक यानी 11 वर्षों तक इसका सुधार क्यों नहीं किया गया और किस आधार पर राशि बदली गई।


कोर बैंकिंग सिस्टम (CBS) पर विभागीय दावों पर कानूनी घेराबंदी

अदालत ने डाक विभाग के उस बयान पर भी कड़ा एतराज जताया जिसमें कहा गया था कि 'सीबीएस' (CBS) में दिख रही राशि वास्तविक जमा राशि नहीं होती। लोक अदालत ने पूछा कि विभाग का यह दावा किस वैधानिक नियम, परिपत्र या अधिसूचना पर आधारित है, उसकी प्रमाणित प्रति अदालत में दाखिल की जाए। बिना ठोस कागजी सबूत के केवल मौखिक तर्कों के आधार पर खाते की राशि को नकारने से अदालत ने साफ इनकार कर दिया।


2015 से 2026 तक का लेजर और खाता विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश

मामले की पारदर्शिता तय करने के लिए स्थायी लोक अदालत ने डाक विभाग को 26 दिसंबर 2015 से 31 मार्च 2026 तक का सत्यापित एवं प्रमाणित खाता विवरण (Statement of Account) या लेजर जमा करने का सख्त निर्देश दिया है। इसके अलावा, यदि नियमों के तहत वादी पात्र हैं, तो उन्हें तुरंत डुप्लीकेट पासबुक जारी कर न्यायालय में अनुपालन रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।


जवाब न मिलने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनीपटना आईजी को भी भेजी गई प्रति

अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि तय 15 दिनों के भीतर संतोषजनक और दस्तावेज-आधारित स्पष्टीकरण नहीं मिलता है, तो उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर एकतरफा कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की होगी। इस मामले की प्रति सूचना और आवश्यक कार्रवाई हेतु डाक महानिरीक्षक (IG Posts), बिहार परिमंडल, पटना को भी प्रेषित कर दी गई है।


विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट