बीएन मंडल यूनिवर्सिटी के कुलपति पर एबीवीपी का बड़ा हमला, फिलीस्तीन-बांग्लादेशी प्रेम पर भारी पड़ा आक्रोश, फूंका पुतला
भारत सरकार के 'पीएम ऊषा' (PM-USHA) फंड के तहत आवंटित राशि को कथित तौर पर 'विभाजनकारी' और 'राष्ट्रविरोधी' विचारधारा के प्रचार-प्रसार में खर्च करने पर बीएन मंडल विवि के कुलपति का विरोध शुरू हो गया है।
Supaul - बीएन मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा के कुलपति के खिलाफ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने मोर्चा खोल दिया है। सुपौल में जिला संयोजक राजेश गुप्ता के नेतृत्व में छात्रों ने कुलपति का पुतला फूंककर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। मामला भारत सरकार के 'पीएम ऊषा' (PM-USHA) फंड के तहत आवंटित राशि को कथित तौर पर 'विभाजनकारी' और 'राष्ट्रविरोधी' विचारधारा के प्रचार-प्रसार में खर्च करने से जुड़ा है। एबीवीपी ने कुलपति की मानसिकता को 'जिहादी' करार देते हुए उन्हें तत्काल निलंबित करने और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
'पीएम ऊषा' फंड के बंदरबांट का गंभीर आरोप
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद सुपौल के जिला संयोजक राजेश गुप्ता ने कहा कि भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा विश्वविद्यालय के विकास के लिए 'प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान' (PM-USHA) के तहत 44 लाख रुपये आवंटित किए गए थे। आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस राशि का उपयोग शैक्षणिक सुधार के बजाय ऐसे वक्ताओं को बुलाने और कार्यक्रमों के आयोजन में कर रहा है, जो समाज को बांटने वाली विचारधारा को बढ़ावा देते हैं। छात्रों ने इसे सार्वजनिक धन का 'बंदरबांट' और राष्ट्रविरोधी ताकतों को खाद-पानी देने जैसा बताया है।
बांग्लादेशी वक्ताओं को बुलाने पर बढ़ा बवाल
एबीवीपी के प्रदेश सह मंत्री शिवजी कुमार ने कड़े शब्दों में कहा कि एक तरफ बांग्लादेश में हिंदुओं का कत्लेआम हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ विश्वविद्यालय के कुलपति वहां के वक्ताओं को बुलाकर उन्हें मंच प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ये वक्ता बांग्लादेश में हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाएंगे? परिषद नेताओं का मानना है कि कुलपति की यह पहल उनकी संकीर्ण और उग्र विचारधारा को दर्शाती है, जिसे बिहार की पावन और ज्ञानमयी भूमि पर कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा।
'जिहादी' मानसिकता और फिलीस्तीन-बांग्लादेशी कनेक्शन का आरोप
प्रदेश कार्य समिति सदस्य भवेश झा ने कुलपति पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि फिलीस्तीन और बांग्लादेश जैसे देशों के वक्ताओं को बुलाने की आखिर क्या मजबूरी थी? उन्होंने कहा कि जब पूरा देश इन विभाजनकारी नीतियों के खिलाफ खड़ा है, तब विश्वविद्यालय प्रशासन शिक्षा के मंदिर में ऐसी संकीर्ण सोच को बढ़ावा दे रहा है। एबीवीपी ने चेतावनी दी है कि किसी भी प्रकार की उग्र या समाज को बांटने वाली मानसिकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे वक्ताओं का बिहार में प्रवेश वर्जित रहेगा।
तत्काल निलंबन और जांच की मांग
प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य रंजीत झा ने बिहार सरकार और राजभवन से मांग की है कि कुलपति को उनके पद से अविलंब निलंबित किया जाए। परिषद का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की गतिविधियों की जांच किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से कराई जानी चाहिए ताकि 'पीएम ऊषा' फंड के दुरुपयोग और कुलपति के 'संदिग्ध संपर्कों' का सच सामने आ सके। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से इस पूरे प्रकरण पर सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देने की भी मांग की है।
सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने भरी हुंकार
पुतला दहन कार्यक्रम के दौरान मनीष कुमार, किशोर कुमार, पंकज कुमार, रितिक कुमार और बड़ी संख्या में छात्रा कार्यकर्ता जैसे आरती, ज्योति, नीतू सहित सैकड़ों सदस्य मौजूद थे। छात्रों के इस उग्र प्रदर्शन ने स्पष्ट कर दिया है कि बीएन मंडल विश्वविद्यालय में वैचारिक जंग आने वाले दिनों में और तेज होने वाली है। एबीवीपी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अगर इन गतिविधियों पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई, तो परिषद पूरे राज्य में उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी।
रिपोर्ट - विनय कुमार मिश्रा