Nitish Kumar Samriddhi Yatra: वैशाली में फिर फिसले मुख्यमंत्री के अल्फाज, बुद्ध सम्यक दर्शन बना वृद्ध सम्यक दर्शन

Nitish Kumar Samriddhi Yatra:बिहार की सियासत में एक बार फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बोल चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।

वैशाली में फिर फिसले मुख्यमंत्री के अल्फाज- फोटो : reporter

Nitish Kumar Samriddhi Yatra:बिहार की सियासत में एक बार फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बोल चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। समृद्धि यात्रा के दौरान वैशाली पहुंचे मुख्यमंत्री का संबोधन उस वक्त सुर्खियों में आ गया, जब उन्होंने वैशाली में बने प्रतिष्ठित बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय को मंच से दो बार “वृद्ध सम्यक दर्शन” कह दिया। यह चूक मामूली नहीं मानी जा रही, क्योंकि जिस स्मारक का नाम उन्होंने गलत बोला, उसी का उद्घाटन चुनाव से पहले खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वैशाली जाकर किया था।

बुद्ध सम्यक दर्शन आज सिर्फ बिहार या देश तक सीमित पहचान नहीं रखता, बल्कि विदेशों में भी इसकी ख्याति है। हर साल बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक यहां आते हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री द्वारा उसका नाम गलत लेना सियासी गलियारों में हैरत और फुसफुसाहट का सबब बन गया है। हैरानी की बात यह रही कि मंच पर मौजूद किसी भी मंत्री, विधायक या आला अधिकारी ने इस गलती की ओर ध्यान नहीं दिलाया।

समृद्धि यात्रा के तहत मुख्यमंत्री वैशाली जिले के महुआ और जंदाहा प्रखंड स्थित बटेश्वर नाथ मंदिर परिसर में दोपहर बाद पहुंचे थे। यहीं विशाल जनसभा का आयोजन किया गया था। सभा के लिए बटेश्वर नाथ मंदिर के पास बड़े भू-भाग में हाईटेक पंडाल बनाया गया, जहां मुख्यमंत्री को देखने और सुनने के लिए भारी भीड़ उमड़ी। सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे। मंच पर मुख्यमंत्री के साथ दोनों उप मुख्यमंत्री, कई मंत्री, विधायक और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने वैशाली वासियों को 15,194.31 करोड़ रुपये की लागत से जुड़ी कुल 128 विकास योजनाओं का तोहफा देने का ऐलान किया। विकास के इन दावों के बीच मुख्यमंत्री की जुबान से निकली यह चूक चर्चा का केंद्र बन गई। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जब विकास की बातों के साथ ऐसी गलतियां जुड़ती हैं, तो संदेश कमजोर पड़ जाता है।

बहरहाल, यह पहली बार नहीं है जब हाल के दिनों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कोई हरकत या बयान सुर्खियों में आया हो। इससे पहले भी उनके सार्वजनिक व्यवहार और भाषणों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। यही वजह है कि बिहार की राजनीति में यह बहस लगातार तेज होती जा रही है कि आखिर मुख्यमंत्री के दाएं और बाएं दोनों ओर उप मुख्यमंत्री क्यों मौजूद रहते हैं।

अब इस पूरे घटनाक्रम के बाद सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह महज जुबान की फिसलन थी, या फिर मुख्यमंत्री को दी गई स्क्रिप्ट में ही कोई चूक थी। यह तो जांच और आकलन का विषय है, लेकिन इतना तय है कि वैशाली की धरती से उठी यह सियासी गूंज आने वाले दिनों में विपक्ष को एक और हमला करने का मौका जरूर देगी।

रिपोर्ट- ऋषभ कुमार