Gold Loan: बैंक में सोना गिरवी रख लिया लाखों का लोन, बाद में बोला ‘नकली’; आयोग ने बैंक को दिया ₹14.5 लाख देने का आदेश

Gold Loan: शिमला में गोल्ड लोन के मामले में बैंक ने बाद में गिरवी रखे सोने को नकली बताया। उपभोक्ता आयोग ने बैंक को जिम्मेदार माना और ग्राहक को करीब 14.5 लाख रुपये देने का आदेश दिया।

Gold Loan: अगर आपने बैंक में सोना गिरवी रखकर गोल्ड लोन लिया है, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है। शिमला में सोने के बदले लिए गए लोन को लेकर बैंक और ग्राहक के बीच विवाद उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा। बैंक ने बाद की जांच में गिरवी रखे सोने के आभूषणों को नकली बताया और ग्राहक से बकाया लोन चुकाने को कहा। ग्राहक ने इसका विरोध किया।


मामले की सुनवाई करते हुए शिमला जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बैंक को सेवा में कमी और गलत व्यापार व्यवहार के लिए जिम्मेदार माना। आयोग ने बैंक को ग्राहक को करीब 14.5 लाख रुपये देने का आदेश दिया है।


ग्राहक ने तीन बार लिया था गोल्ड लोन


मामला शिमला का है। शिकायतकर्ता ने बैंक में अपने सोने के आभूषण गिरवी रखकर अलग-अलग समय पर तीन लोन लिए थे। साल 2022 में उसे 3.98 लाख रुपये का लोन मिला था। इसके बाद मार्च 2023 में उसने 3.98 लाख रुपये और अप्रैल 2023 में 6.42 लाख रुपये का एक और लोन लिया। ग्राहक का कहना था कि हर बार बैंक के अधिकृत विशेषज्ञों ने सोने के आभूषणों का वजन और उनकी शुद्धता जांची थी। जांच के बाद ही बैंक ने लोन मंजूर किया था।


बाद में बैंक ने सोने को बताया नकली


जुलाई 2023 में बैंक ने ग्राहक को बताया कि बाद में की गई जांच में उसके द्वारा गिरवी रखे गए आभूषण नकली पाए गए हैं। इसके बाद बैंक ने ग्राहक से करीब 10.95 लाख रुपये की बकाया लोन राशि के साथ ब्याज, शुल्क और टैक्स जमा करने को कहा। ग्राहक ने बैंक की इस रिपोर्ट पर सवाल उठाया। उसका कहना था कि दूसरी बार सोने की जांच उसकी जानकारी और मौजूदगी के बिना की गई। उसने यह भी आशंका जताई कि बैंक के पास आभूषण रखे जाने के दौरान उनमें बदलाव या छेड़छाड़ हुई हो सकती है। ग्राहक ने कहा कि अगर स्वतंत्र जांच के बाद उसे उसके सही आभूषण वापस कर दिए जाते हैं, तो वह बैंक का बकाया पैसा चुकाने के लिए तैयार है।


बैंक ने पुराने मूल्यांकन करने वाले को जिम्मेदार बताया


बैंक ने आयोग के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि नियमित आंतरिक जांच के दौरान एक अधिकृत मूल्यांकन करने वाले व्यक्ति से आभूषणों की जांच कराई गई थी। इसी जांच में आभूषणों को नकली बताया गया। बैंक ने इसके लिए उस मूल्यांकनकर्ता को जिम्मेदार बताया, जिसने शुरुआत में इन आभूषणों की जांच की थी। बैंक के अनुसार, उसके खिलाफ पुलिस में शिकायत भी की गई थी।


आयोग ने बैंक को क्यों जिम्मेदार माना?


शिमला जिला उपभोक्ता आयोग ने 23 सितंबर को इस मामले में फैसला सुनाया। आयोग ने बैंक को सेवा में कमी और गलत व्यापार व्यवहार के लिए जिम्मेदार माना। आयोग ने कहा कि बैंक यह साबित नहीं कर पाया कि ग्राहक को जानकारी देकर या उसकी सहमति से गिरवी रखे गए आभूषणों की दोबारा जांच की गई थी। ऐसे में बाद की जांच में सामने आई गड़बड़ी का पूरा जिम्मेदार ग्राहक को नहीं माना जा सकता। आयोग ने बैंक को 103 ग्राम 22 कैरेट सोने के मौजूदा बाजार मूल्य के बराबर करीब 14 लाख रुपये देने का आदेश दिया। इसके अलावा ग्राहक को 30 हजार रुपये मुआवजा और 20 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के लिए देने को कहा गया। इस तरह ग्राहक को कुल करीब 14.5 लाख रुपये की राहत मिलने का आदेश दिया गया।


RBI के नियमों का भी हुआ जिक्र


आयोग ने अपने फैसले में भारतीय रिजर्व बैंक के 29 सितंबर 2025 के नियमों का भी जिक्र किया। इन नियमों के तहत बैंक गोल्ड लोन के दौरान आंतरिक जांच के लिए अचानक सोने की जांच कर सकते हैं। हालांकि, इसके लिए लोन समझौते में ऐसी जांच का प्रावधान होना चाहिए। ग्राहक को लोन देते समय इस बारे में जानकारी भी दी जानी चाहिए। इस मामले में आयोग ने पाया कि बैंक यह साबित नहीं कर सका कि ग्राहक ने अपनी गैरमौजूदगी में ऐसी जांच कराने की सहमति दी थी। साथ ही, बैंक पहले ही उन्हीं आभूषणों की जांच करके उन्हें स्वीकार कर चुका था और उसके आधार पर लोन दिया गया था। इसी वजह से आयोग ने ग्राहक को बाद की जांच में सामने आई गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार नहीं माना और बैंक को ग्राहक को राहत देने का आदेश दिया।