RBI Repo Rate Hike: आम आदमी को अब लोन महंगा-EMI बढ़ेगी , RBI ने रेपो रेट की बड़ी बढ़ोत्तरी

रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर RBI बैंकों को पैसा उधार देता है। जब रेपो रेट बढ़ता है तो बैंकों के लिए फंड जुटाने की लागत बढ़ सकती है। इसका असर बैंक की लोन दरों पर पड़ सकता है।

RBI Repo Rate Hike- फोटो : news4nation

RBI :  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने महंगाई के दबाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच बड़ा फैसला लिया है। RBI ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी करते हुए इसे 5.5 फीसदी कर दिया है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को मौद्रिक नीति समिति के फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि ब्याज दर बढ़ाने का फैसला MPC ने सर्वसम्मति से लिया है। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपनी नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है। इसका संकेत है कि फिलहाल ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम है और आगे जरूरत पड़ने पर दर बढ़ाने या यथास्थिति बनाए रखने का विकल्प खुला है।


साढ़े तीन साल से ज्यादा समय बाद रेपो रेट में बढ़ोतरी

RBI का यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि केंद्रीय बैंक ने साढ़े तीन साल से अधिक समय के बाद पहली बार रेपो रेट में बढ़ोतरी की है। अगस्त में खुदरा महंगाई लगातार तीसरे महीने RBI के मध्यम अवधि के 4 फीसदी लक्ष्य से ऊपर रही। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने रुपये पर भी दबाव बढ़ाया है। इन परिस्थितियों को देखते हुए MPC ने ब्याज दर बढ़ाने का फैसला किया।


रेपो रेट बढ़ने का आम लोगों पर क्या असर?

रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर RBI बैंकों को पैसा उधार देता है। जब रेपो रेट बढ़ता है तो बैंकों के लिए फंड जुटाने की लागत बढ़ सकती है। इसका असर बैंक की लोन दरों पर पड़ सकता है। खासकर फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन और अन्य कर्ज की EMI बढ़ने की संभावना रहती है। हालांकि इसका वास्तविक असर बैंकों की ब्याज दरों में बदलाव और लोन के प्रकार पर निर्भर करेगा।


SDF और MSF रेट में भी बदलाव

रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद RBI ने अन्य प्रमुख दरों में भी बदलाव किया है। SDF रेट 5.25 फीसदी, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट और बैंक रेट 5.75 फीसदी हो गए हैं।


महंगाई को लेकर RBI की चिंता

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि पिछले साल की तुलना में महंगाई और उसका आउटलुक अब उतना अनुकूल नहीं है। उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर महंगाई का दबाव कई वस्तुओं में दिखाई देने लगा है। RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान भी 5 फीसदी से बढ़ाकर 5.1 फीसदी कर दिया है। गवर्नर के मुताबिक अगले तीन तिमाहियों में हेडलाइन CPI महंगाई का औसत करीब 5.8 फीसदी रहने का अनुमान है, जबकि इस वित्त वर्ष के लिए कोर महंगाई का अनुमान 4.4 फीसदी रखा गया है।


GDP ग्रोथ का अनुमान 7.1% किया

महंगाई के दबाव के बावजूद RBI ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक रुख कायम रखा है। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 40 बेसिस प्वाइंट बढ़ाकर 7.1 फीसदी कर दिया है। RBI गवर्नर ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार व्यापक स्तर पर कायम है। उनके मुताबिक मौजूदा परिस्थितियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के लचीली बने रहने की उम्मीद है।


कमजोर मानसून और अल नीनो से  असर  

RBI ने आने वाले समय में कुछ जोखिमों को भी रेखांकित किया है। गवर्नर ने कहा कि कमजोर मानसून और मजबूत अल नीनो का असर आगामी रबी सीजन पर पड़ सकता है। इसके अलावा वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और सप्लाई चेन में आने वाली रुकावटों का असर घरेलू आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ने की आशंका है।


FDI में सुधार, विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत

RBI के मुताबिक भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में भी सुधार जारी है। वित्त वर्ष के शुरुआती चार महीनों में नेट FDI बढ़कर 13.8 अरब डॉलर हो गया, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 9.6 अरब डॉलर था। वहीं, देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी मजबूत स्थिति में है। RBI गवर्नर ने कहा कि मौजूदा विदेशी मुद्रा भंडार करीब 11 महीने के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है। बैंकिंग क्षेत्र में क्रेडिट ग्रोथ भी मजबूत और व्यापक बनी हुई है।


आगे क्या होगा?

RBI के बदले हुए नीति रुख ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ से स्पष्ट है कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम हो गई है। संजय मल्होत्रा ने संकेत दिया कि मौजूदा परिस्थितियों में आगे की कार्रवाई रेपो रेट बढ़ाने या उसे मौजूदा स्तर पर बनाए रखने तक सीमित रह सकती है। उन्होंने कहा कि RBI का लक्ष्य मूल्य स्थिरता के साथ वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना है, क्योंकि दीर्घकाल में टिकाऊ आर्थिक विकास के लिए दोनों जरूरी हैं।