अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से झटका, जानिए कोर्ट ने क्यों कहा 2030 तक रहेगा जेल में... 1993 मुंबई ब्लास्ट में है दोषी

अबू सलेम को नवंबर 2005 में पुर्तगाल से भारत प्रत्यर्पित किया गया था। प्रत्यर्पण से पहले भारत सरकार ने पुर्तगाल को आश्वासन दिया था कि सलेम को न तो मृत्युदंड दिया जाएगा और न ही 25 साल से अधिक अवधि की कैद भुगतनी होगी।

1993 Mumbai Blasts Convict Abu Salem- फोटो : news4nation

Abu Salem : 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे गैंगस्टर अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उसकी समयपूर्व रिहाई की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। सलेम ने दावा किया था कि भारत में 25 साल की हिरासत पूरी हो चुकी है और पुर्तगाल से प्रत्यर्पण के दौरान भारत की ओर से दिए गए आश्वासन के तहत उसे अब रिहा किया जाना चाहिए।


जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के अप्रैल 2026 के फैसले को बरकरार रखा। हाईकोर्ट ने सलेम की याचिका को समय से पहले और गलत आधार पर दायर बताते हुए खारिज किया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी दलीलों में तत्काल रिहाई का आधार नहीं माना।


क्या है 25 साल का मामला?

अबू सलेम को नवंबर 2005 में पुर्तगाल से भारत प्रत्यर्पित किया गया था। प्रत्यर्पण से पहले भारत सरकार ने पुर्तगाल को आश्वासन दिया था कि सलेम को न तो मृत्युदंड दिया जाएगा और न ही 25 साल से अधिक अवधि की कैद भुगतनी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में भी इस आश्वासन को ध्यान में रखते हुए कहा था कि 25 साल की अवधि पूरी होने पर केंद्र सरकार को रिहाई के लिए राष्ट्रपति के समक्ष आवश्यक प्रक्रिया शुरू करनी होगी।


सलेम का तर्क था कि जेल में उसके अच्छे आचरण के बदले मिली रिमिशन और हिरासत की अवधि को जोड़ने पर 25 साल की अवधि पूरी हो चुकी है। हालांकि अदालतों ने माना कि सामान्य जेल रिमिशन को 25 साल की निर्धारित अवधि में जोड़कर रिहाई की तारीख और पहले नहीं की जा सकती। बॉम्बे हाईकोर्ट के अनुसार 25 साल की अवधि नवंबर 2030 में पूरी होगी।


अबू सलेम को 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में 2017 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। इसके अलावा 1995 में मुंबई के बिल्डर प्रदीप जैन की हत्या के मामले में भी उसे उम्रकैद मिली है।