छात्राओं की नंगी तस्वीर खिचने के काले खेल से मचा हड़कंप, बांका के इंजीनियरिंग कॉलेज में डिजिटल अपमान से सनसनीखेज खौफ! महिलाओं की गरिमा पर डाका पर क्या कहता है कानून, पढ़िए

Bihar Crime: बिहार के आंचल में बसे बाँका के राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज के तन्हा और सुरक्षित समझे जाने वाले गर्ल्स हॉस्टल की चारदीवारी के भीतर, शिक्षा और तहज़ीब के इस केंद्र कुछ ऐसा गुनाह सरज़मीं पर उतरा, जिसने रूह को कँपा कर रख दिया।

छात्राओं की नंगी तस्वीर खिचने के काले खेल से मचा हड़कंप- फोटो : social Media

Bihar Crime: बिहार के आंचल में बसे बाँका के राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज के तन्हा और सुरक्षित  समझे जाने वाले गर्ल्स हॉस्टल की चारदीवारी के भीतर, शिक्षा और तहज़ीब के इस केंद्र कुछ ऐसा गुनाह सरज़मीं पर उतरा, जिसने रूह को कँपा कर रख दिया। शिक्षा की इस केंद्र में जहाँ किताबों और किताबों की रौशनी से सँवारा जाना था, वहीं कुछ शातिरों ने खामोशी और तारीकी का फायदा उठाकर बेटियों के सुकूत और उनकी आबरू को चंद डिजिटल पन्नों और स्क्रीन का मोहताज बना दिया। यह स्याह वाकया महज़ एक कॉलेज का वाकया नहीं, बल्कि जमीर को झकझोर देने वाला वह नासूर है जहाँ मोबाइल के कैमरे और स्पाई लेंस ने हॉस्टल के कमरों और टॉयलेट कीा सीमाओं को भी नहीं बख्शा।

गैरों की नज़र और ‘मेल फ्रेंड’ की दहलीज़ पर आबरू

शिकायत के मुताबिक, हॉस्टल की अपनी ही हमजोलियों की निजी पलों की तस्वीरें खासतौर पर उनके कमरे के भीतर और नहाते वक्त के वीडियो चोरी-छिपे और बिना इजाजत के कैद किए। गुनाह का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका; इस घटिया हरक़त को अंजाम देने के बाद इन तसवीरों को एक मेल फ्रेंड के हवाले कर दिया गया। फिर शुरू हुआ डिजिटल फितने का वह खौफ़नाक खेल, जहाँ वॉट्ऐप, स्नैपचैट और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया के जरियों से इन प्राइवेट वीडियोज़ को हवा की मानिंद आगे फॉरवर्ड कर दिया गया। हॉस्टल के गलियारों और कमरों के इर्द-गिर्द कथित तौर पर स्पाई कैमरे छुपाए जाने की इत्तिला ने माहौल में दहशत और खौफ का समंदर पैदा कर दिया।

बेटियों का हंगामा और आधी रात को खाकी की आमद

5 अगस्त को जब कुछ छात्राओं को इस ज़िल्लत की भनक लगी, तो उन्होंने कॉलेज के सामने अपनी फरियाद रखी। लेकिन बेपरवाह बने प्रबंधन ने शुरुआती मरहले में इस संगीन इल्तेजा को सिरे से नजरअंदाज कर दिया। फिर क्या था, सब्र का पैमाना लबालब हो गया और 6 अगस्त को सैकड़ोंछात्र-छात्राएं कैंपस की सड़कों पर उतर आए। इंसाफ के लिए किया गया यह हंगामा चीख-पुकार और रोष की ऐसी आंधी बन गया कि कॉलेज की नींव हिल उठी।हंगामे की इत्तिला मिलते ही आधी रात के सन्नाटे में SDM, SDPO और टाउन पुलिस के आला अफसर मौके पर पहुंचे। उन्होंने मुनसिफराना (निष्पक्ष) जांच का यकीन दिलाया और फौरन मुल्जिम छात्र-छात्रा के फोन और लैपटॉप को अने कब्ज़े में लेकर फॉरेंसिक जांच के लिए रवाना कर दिया।

कमेटी की हंगामी बैठक और खाकी की तफ्तीश के पेंच

मामले की नज़ाकत को भांपते हुए कॉलेज प्रशासन ने 8 सदस्यीय आंतरिक शिकायत समिति (ICC) की एक हंगामी बैठक बुलाई। इस जलसे में छात्राओं की तहरीर, मुल्जिमों के बयानों और गवाहों की गवाही का बारीक जायजा लिया गया। समिति की शुरुआती रिपोर्ट की बिना पर प्रिंसिपल डॉ. मोहम्मद शबीरुद्दीन ने बाँका थाने में FIR दर्ज कराई।

प्रिंसिपल ने सख़्त कदम उठाते हुए दोनों आरोपी स्टूडेंट्स को मौजूदा अकादमिक सत्र के लिए कॉलेज से निष्कासित कर दिया। हालांकि, दूसरी तरफ बाँका पुलिस की शुरुआती तफ्तीश का रुख कुछ और ही दास्तां बयां करता है। पुलिस का कहना है कि अब तक की तहकीकात में किसी भी मोबाइल, लैपटॉप या दीगर जगहों से कोई भी अश्लील वीडियो या स्पाई कैमरा बरामद नहीं हुआ है। डिजिटल सबूतों की मु मुकम्मल रिपोर्ट आने के बाद ही इस मामले की असलियत खुलकर सामने आएगी।

कानून की तलवार: IT एक्ट और BNS की सख्त धाराएं

चुपके से किसी की तस्वीर खींचना या उसका वीडियो बनाना मुल्क के कानून की निगाह में एक संगीन जुर्म है। ऐसे गुनाहगारों के खिलाफ कई सख्त कानूनी पहलुओं के तहत शिकंजा कसा जा सकता है:IT एक्ट, 2000 की धारा 66E: रजामंदी के बगैर किसी के निजी अंगों या मखसूस पलों की तस्वीर लेना या उसे इंटरनेट की दुनिया में फैलाने पर 3 साल तक की कैद या 2 लाख रुपए तक का जुर्माना मुकर्रर है।BNS की धारा-77 (साबिका IPC की धारा 354C): किसी खातून के निजी पलों (जैसे लिबास बदलना, वॉशरूम का इस्तेमाल या एकांत) की चोरी-छिपे तस्वीरें लेने पर 'वॉयरिज्म' (ताक-झांक) का जुर्म साबित होता है। पहली बार में 1 से 3 साल और दोबारा पकड़े जाने पर 3 से 7 साल तक की कैद हो सकती है।

मानहानि और तौहीन की धाराएं: किसी की इज्जत को मिट्टी में मिलाने के मकसद से वीडियो वायरल करने पर BNS की धारा 356 और ख्वातीन की तौहीन व गरिमा को ठेस पहुँचाने पर BNS की धारा 74 के तहत मुकदमा दर्ज किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में यह साफ किया था कि अगर कोई महिला निजी पलों में नहीं है, तो उसकी रजामंदी के बिना फोटो खींचना महज़ इसलिए ताक-झांक नहीं माना जा सकता, जब तक कि उसकी मर्यादा और पाकीज़गी को सीधा नुकसान न पहुँचाया गया हो। अदालत ने इस बात पर जोर दिया था कि ऐसे मामलों में जहाँ विवाद असल में सिविल फितरत का हो, वहाँ आपराधिक अदालतों के वक्त को ज़ाया होने से बचाने के लिए फिल्टर का काम किया जाना चाहिए।

साइबर दुनिया में जुर्म के खिलाफ हिफाजत के रास्ते

अगर कोई शख्स आपकी मर्जी के बिना आपकी निजी मालूमात या वीडियो को सोशल मीडिया की जीनत बनाता है, तो आप इन रास्तों से अपने हुकूक की हिफाजत कर सकते हैं:सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म: जिस मखसूस ऐप पर वीडियो शेयर किया गया है, उसके रिपोर्ट विकल्प पर फौरन शिकायत दर्ज कराएं।साइबर सेल: 'National Cyber Crime Reporting Portal' की मदद से ऑनलाइन शिकायती अर्जी दें।हेल्पलाइन नंबर: नेशनल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके तुरंत मदद लें।