Bihar Crime: दबंगों का तांडव, अपराधियों ने की रंगदारी नहीं देने पर मुखिया की पिटाई, कट्टे के बट से मार कर किया घायल

Bihar Crime:सूबे में सुशासन के दावों के बीच जरायमपेशा तत्वों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब वे जनप्रतिनिधियों के खून के प्यासे हो गए हैं।...

अपराधियों ने की रंगदारी नहीं देने पर मुखिया की पिटाई- फोटो : reporter

Bihar Crime:सूबे में सुशासन के दावों के बीच जरायमपेशा तत्वों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब वे जनप्रतिनिधियों के खून के प्यासे हो गए हैं। ताजा मामला नवगछिया पुलिस जिला के गोपालपुर थाना अंतर्गत तिनटंगा करारी गांव का है, जहाँ रंगदारी की मांग पूरी न होने पर बेखौफ बदमाशों ने गांव के मुखिया नगीना पासवान पर जानलेवा हमला कर इलाके में दहशत फैला दी है।

जानकारी के मुताबिक, इस वारदात की पटकथा होली के त्योहार के नाम पर रची गई थी। घायल मुखिया नगीना पासवान ने पुलिस को दी गई अपनी तहरीर में गांव के ही दबंग संजय यादव (पिता स्वर्गीय ठोसली यादव) पर संगीन आरोप लगाए हैं। बताया जा रहा है कि संजय ने मुखिया से होली के 'खर्चे' के नाम पर एक लाख रुपये की अवैध रंगदारी की मांग की थी। जब मुखिया ने इस नाफरमानी की जुर्रत की और पैसे देने से इनकार कर दिया, तो आरोपी आगबबूला हो गया।

गुरुवार की काली रात को तिनटंगा करारी गांव उस वक्त दहल गया, जब कथित तौर पर संजय यादव अपने गुर्गों पियूष यादव और बासुकी यादव सहित अन्य अज्ञात हमलावरों के साथ मुखिया के आवास पर धमका। सभी आरोपी अवैध असलहों से लैस थे। चश्मदीदों के मुताबिक, आरोपियों ने घर में घुसते ही गाली-गलौज शुरू कर दी और मुखिया पर कहर बनकर टूट पड़े।पीड़ित मुखिया के अनुसार आरोपियों ने जातिसूचक अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए देशी कट्टे के बट से मेरे चेहरे पर ताबड़तोड़ प्रहार किए। वे मुझे जान से मारने की नीयत से आए थे।

चीख-पुकार सुनकर जब तक गांव के लोग इमदाद के लिए मौके पर पहुंचे, तब तक हमलावर अंजाम भुगतने की धमकी देते हुए अंधेरे का फायदा उठाकर रफूचक्कर हो गए। खून से लथपथ मुखिया को आनन-फानन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रगोपालपुर ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उनका प्राथमिक उपचार किया।

घटना के बाद इलाके में भारी तनाव व्याप्त है। पीड़ित मुखिया ने गोपालपुर थाने में नामजद प्राथमिकी दर्ज करने के लिए आवेदन दिया है। पुलिस अब इन फरार मुजरिमों की धरपकड़ के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की बात कह रही है। सवाल यह है कि अगर गांव का मुखिया ही सुरक्षित नहीं है, तो आम आवाम का क्या होगा?

रिपोर्ट- बालमुकुंद शर्मा