भुटकुन शुक्ला हत्याकांड: बदले की आग, गैंगवार और 29 साल बाद इंसाफ... बिहार के अंडरवर्ल्ड की सबसे खौफनाक कहानी

छोटन शुक्ला की हत्या का बदला लेने के लिए भुटकुन शुक्ला ने सबसे पहले बृज बिहारी के करीबी शार्प शूटर ओंकार सिंह को निशाना बनाया। वर्ष 1996 में मुजफ्फरपुर के जीरो माइल पर ओंकार सिंह और उसके साथियों को चारों तरफ से घेर लिया गया।

Bhutkun Shukla Murder Case- फोटो : news4nation

Bhutkun Shukla Murder Case : बिहार के सबसे चर्चित गैंगवारों में शामिल भुटकुन शुक्ला हत्याकांड में करीब 29 साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। मुजफ्फरपुर की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-10 की अदालत ने मुख्य आरोपी दीपक कुमार सिंह को हत्या का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अवैध हथियार के इस्तेमाल के मामले में भी उसे दोषी ठहराया गया है। अदालत के इस फैसले के साथ ही 1990 के दशक में तिरहुत के अपराध जगत को हिला देने वाले इस बहुचर्चित हत्याकांड की लंबी न्यायिक प्रक्रिया अपने निर्णायक मुकाम पर पहुंच गई।


छोटन शुक्ला की हत्या से शुरू हुई खूनी अदावत

भुटकुन शुक्ला की हत्या की पटकथा तीन साल पहले ही लिखी जा चुकी थी। 4 दिसंबर 1994 को केसरिया विधानसभा से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे बाहुबली छोटन शुक्ला की मुजफ्फरपुर में AK-47 से ताबड़तोड़ फायरिंग कर हत्या कर दी गई थी। इस वारदात के पीछे तत्कालीन प्रभावशाली नेता बृज बिहारी प्रसाद और उनके गुर्गों पर आरोप लगे। भाई की हत्या के बाद भुटकुन शुक्ला ने खुलेआम ऐलान किया था—"खून का बदला खून से लिया जाएगा।" इसके बाद उत्तर बिहार में गैंगवार और खूनी संघर्ष का दौर तेज हो गया।


हालांकि इसी बीच 5 दिसम्बर 1994 को जब छोटन शुक्ला की शव यात्रा जा रही थी, एनएच-24 होकर उनकी शवयात्रा उनके पैतृक गांव की ओर प्रस्थान कर रही थी। कहते हैं करीब 20 हजार की संख्या में छोटन शुक्ला के समर्थक इस शवयात्रा में शामिल थे। इसी बीच गोपालगंज के जिलाधिकारी DM जी. कृष्णैया की गाड़ी वहां से गुजर रही थी।  साइड लेने के लिए ड्राइवर ने हॉर्न बजाया। आक्रोशित भीड़ और उग्र हो गई। किसी ने यह नहीं देखा कि कार में कौन बैठा है। बत्ती लगी गाड़ी देखते ही भीड़ ने हमला कर दिया। देखते-देखते चंद मिनट में गोपालगंज के जिलाधिकारी की भीड़ ने हत्या कर दी। उन्हें बेहद करीब से गोली मारी गई थी। बिहार में मॉब लिंचिंग की यह सबसे बड़ी घटना थी। पूरे बिहार में तहलका मच गया। इस हत्याकांड की गूंज दिल्ली तक पहुंच गई। स्पेशल टीम ने बिहार में कैंप किया। पूरे देश में अंडरवल्र्ड डॉन छोटन शुक्ला और जिलाधिकारी जी कृष्णैया की हत्या गूंजने लगी। जिलाधिकारी हत्या के मुख्य आरोपी भुटकुन शुक्ला, आनंद मोहन, लवली आनंद, मुन्ना शुक्ला को बनाया गया।   


ओंकार सिंह की हत्या से कांप उठा था मुजफ्फरपुर

छोटन शुक्ला की हत्या का बदला लेने के लिए भुटकुन शुक्ला ने सबसे पहले बृज बिहारी के करीबी शार्प शूटर ओंकार सिंह को निशाना बनाया। वर्ष 1996 में मुजफ्फरपुर के जीरो माइल पर ओंकार सिंह और उसके साथियों को चारों तरफ से घेर लिया गया। इसके बाद एक दर्जन से अधिक AK-47 से सैकड़ों राउंड गोलियां बरसाई गईं। इस अंधाधुंध फायरिंग में ओंकार सिंह समेत सात लोगों की मौत हो गई। हालांकि, भुटकुन का असली निशाना अब भी बृज बिहारी प्रसाद ही थे।


बृज बिहारी ने चली सबसे खतरनाक चाल

कहा जाता है कि ओंकार सिंह की हत्या के बाद बृज बिहारी प्रसाद ने अपनी सुरक्षा और बढ़ा दी। मंत्री बनने के बाद वे कमांडो सुरक्षा घेरे में रहने लगे। ऐसे में उनके विरोधियों तक सीधे पहुंचना लगभग असंभव था। इसी दौरान एक नई साजिश रची गई। पुलिस जांच के अनुसार दीपक कुमार सिंह को भुटकुन शुक्ला के गैंग में शामिल कराया गया। धीरे-धीरे उसने वफादार साथी और फिर निजी बॉडीगार्ड के रूप में भुटकुन का भरोसा जीत लिया। कई महीनों तक वह भुटकुन के साथ साये की तरह रहा और सही मौके का इंतजार करता रहा।


जब सबसे भरोसेमंद शख्स ही बन गया कातिल

16 जुलाई 1997 की सुबह वैशाली के खंजाहाचक गांव में भुटकुन शुक्ला रोज की तरह नारायणी नदी यानी गंडक में स्नान कर घर लौटे। इसके बाद वे अपने हथियारों की सफाई करने लगे। जैसे ही उन्होंने अपनी जर्मन मेड ऑटोमैटिक रिवॉल्वर खोलकर अलग रखी, उनके पीछे खड़े बॉडीगार्ड दीपक कुमार सिंह ने AK-47 का ट्रिगर दबा दिया। गोलियों की बौछार में भुटकुन शुक्ला मौके पर ही ढेर हो गए। जिस व्यक्ति को दुश्मन सामने से मारने की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे, उसे उसके सबसे भरोसेमंद साथी ने बेहद करीब से मौत के घाट उतार दिया।


29 साल बाद अदालत का फैसला

करीब तीन दशक तक चले मुकदमे के बाद 30 जुलाई 2026 को अदालत ने मुख्य आरोपी दीपक कुमार सिंह को दोषी करार दिया। अदालत ने IPC की धारा 302 के तहत उसे आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने पर छह माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। वहीं आर्म्स एक्ट की धारा 27(1) के तहत अवैध हथियार के इस्तेमाल के मामले में तीन वर्ष के सश्रम कारावास और 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा भी सुनाई गई।


भुटकुन शुक्ला हत्याकांड को बिहार के अपराध और राजनीति के गठजोड़ का सबसे चर्चित अध्याय माना जाता है। छोटन शुक्ला की हत्या से शुरू हुई यह खूनी दुश्मनी कई बड़े हत्याकांडों से गुजरते हुए आखिरकार भुटकुन शुक्ला की हत्या पर आकर रुकी। अब 29 साल बाद आए अदालत के फैसले ने इस बहुचर्चित मामले को कानूनी तौर पर एक निर्णायक मुकाम तक पहुंचा दिया। हालांकि वर्ष 1998 में बृज बिहारी प्रसाद की पटना के आईजीआईएमएस में हत्या हो गई थी। इसमें भुटकुन शुक्ला के छोटे भाई मुन्ना शुक्ल दोषी करार दिए जा चुके हैंभुटकुन शुक्ला