Bihar News : पटना हाईकोर्ट ने की बिहार न्यायिक अकादमी मामले की सुनवाई, तल्ख तेवरों के बाद हरकत में आई सरकार, शीर्ष अधिकारी कोर्ट में हुए पेश
Bihar News : बिहार न्यायिक अकादमी से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के ढुलमुल रवैये पर सख्त नाराजगी जताई है......पढ़िए आगे
PATNA : बिहार न्यायिक अकादमी से जुड़ी जनहित याचिका पर पटना हाईकोर्ट के तल्ख तेवरों के बाद आखिरकार राज्य सरकार के विभाग सक्रिय हो गया है। एक्टिंग चीफ जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस राजेश कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष राज्य के तीन शीर्ष अधिकारी—पर्यावरण एवं वन विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर, पथ निर्माण सचिव पंकज कुमार पाल तथा नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार—व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। सुनवाई प्रारम्भ होते ही कोर्ट ने प्रशासनिक ढिलाई और कोर्ट आदेशों की अनदेखी पर भारी नाराजगी जताई। कोर्ट ने तीखे लहजे में सवाल किया कि न्यायिक अकादमी जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण संस्थान की सुरक्षा एवं सौंदर्यीकरण के काम में इतना टालमटोल रवैया क्यों अपनाया जा रहा है?
कोर्ट की इस तल्खी के बाद बैकफुट पर आए अधिकारियों ने तुरंत मोर्चा संभाला और निर्माण कार्य की पूरी समय-सीमा प्रस्तुत की। अधिकारियों ने पीठ को आश्वासन दिया कि अकादमी के आसपास बाउंड्री वॉल, महात्मा गांधी सेतु के नीचे के इलाके का सौंदर्यीकरण, बाड़ा लगाने और वृक्षारोपण का समस्त कार्य आगामी 30 नवंबर ,2026 तक हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता पीयूष लाल को पूरे कार्य की निगरानी का जिम्मा सौंपा है। साथ ही किसी भी अड़चन पर तुरंत कोर्ट आने की छूट दी है। पीठ ने अकादमी के निदेशक को भी विभागीय समन्वय बनाकर तय सीमा में काम निपटाने का निर्देश दिया।
पिछली सुनवाईओं में हाइकोर्ट ने न्यायिक अकादमी के पास हुए अतिक्रमण के मामलें पर सुनवाई करते हुए सख्त टिप्पणी की थी। कोर्ट ने राज्य सरकार से इस सम्बन्ध की कार्रवाईयों की रिपोर्ट मांगी थी। बिहार न्यायिक अकादमी के पास अनधिकृत निर्माणों और सुरक्षा चिंताओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार को की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट ऑन रिकॉर्ड लाने का निर्देश दिया था। सभी निर्देशों का त्वरित अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए शहरी विकास विभाग को भी मामले में पक्षकार बनाया गया था और अगली सुनवाई से पहले हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया गया था। इसके पहले पटना हाईकोर्ट में बिहार न्यायिक अकादमी से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अप्रत्याशित घटना देखने को मिली। एक्टिंग चीफ जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस राजेश कुमार वर्मा की पीठ के समक्ष सरकारी पक्ष की ओर से बिना रिकॉर्ड के दी गई मौखिक दलीलों पर हाईकोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई। इस तीखी टिप्पणी के बाद राज्य के महाधिवक्ता एस.डी. संजय ने मामले से खुद को अलग कर लिया। पीठ ने बरती जा रही ढिलाई पर कड़ा रुख अपनाते हुए पथ निर्माण, वन तथा नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिवों को 11 सितंबर ,2026 को सुबह साढ़े दस बजे निजी रूप से हाईकोर्ट में प्रस्तुत होने का आदेश दिया था।
सुनवाई के दौरान एएजी-3 पी.के. वर्मा ने दावा किया कि महात्मा गांधी सेतु के नीचे के क्षेत्र के विकास को लेकर पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता द्वारा हलफनामा दायर किया गया है। लेकिन जब कोर्ट ने पूरी फाइल खंगाली ,तो ऐसा कोई हलफनामा या दस्तावेज रिकॉर्ड पर मौजूद नहीं मिला। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि रिकार्ड के बिना सिर्फ बहस के आधार पर आगे नहीं बढ़ा जा सकता।