Bihar Crime: इंटरपोल तक पहुंचा बिहार का भ्रष्टाचार कनेक्शन, इंजीनियर की काली कमाई का खुलासा,काठमांडू में भी मिली अकूत संपत्ति
Bihar Crime:कार्यपालक अभियंता पर काली कमाई से अकूत संपत्ति खड़ी करने का इल्ज़ाम है और अब इस खेल की गूंज सरहद पार नेपाल तक पहुंच गई है।....
Bihar Crime: बिहार में भ्रष्टाचार का एक ऐसा हाई-प्रोफाइल खेल सामने आया है, जिसने सिस्टम की जड़ों को हिला दिया है। उत्तर बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के जयनगर मधुबनी में तैनात कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार रजक पर काली कमाई से अकूत संपत्ति खड़ी करने का इल्ज़ाम है और अब इस खेल की गूंज सरहद पार नेपाल तक पहुंच गई है।
आर्थिक अपराध इकाई ने इस मनी ट्रेल को पकड़ने के लिए इंटरपोल डेस्क से मदद मांगी है। जांच में खुलासा हुआ है कि रजक ने नेपाल के काठमांडू और सुनसरी में भी अचल संपत्तियां खड़ी कर रखी हैं। सूत्रों की मानें तो ये सिर्फ इन्वेस्टमेंट नहीं, बल्कि बेनामी खेल का हिस्सा भी हो सकता है।
17 मार्च को ईओयू की रेड में जो खजाना मिला, उसने अफसरों के भी होश उड़ा दिए। दरभंगा, जयनगर और सुपौल के ठिकानों पर छापेमारी में 3 करोड़ से ज्यादा की जमीन के दस्तावेज, करीब दो दर्जन प्रॉपर्टी के पेपर, गैस एजेंसी में पार्टनरशिप और दार्जिलिंग में चाय बगान तक के सुराग मिले। यह पूरा नेटवर्क बिहार से लेकर नेपाल और पश्चिम बंगाल तक फैला बताया जा रहा है।
सबसे चौंकाने वाली बात 2009 से पहले यही मनोज रजक एक संघर्षरत छात्र थे, जिन्होंने महज 85 हजार रुपये का एजुकेशन लोन लेकर पढ़ाई पूरी की थी। लेकिन सिर्फ 17 साल की नौकरी में रुतबा ऐसा बना कि अब उन पर करोड़ों की बेनामी संपत्ति का आरोप है। जांच एजेंसियों को शक है कि बार-बार नेपाल यात्रा के दौरान विदेशी इन्वेस्टमेंट और फंडिंग का खेल भी खेला गया। अब ईओयू इस एंगल से भी जांच कर रही है कि कहीं इन संपत्तियों का इस्तेमाल किसी अवैध नेटवर्क या संदिग्ध गतिविधियों में तो नहीं हो रहा।
सवाल बड़ा है क्या ये सिर्फ भ्रष्टाचार का मामला है, या फिर इसके पीछे कोई बड़ा इंटरनेशनल रैकेट छिपा है? जांच की सुई अब सरहद पार तक घूम रही है।