Bihar Crime:गयाजी का रहने वाला दवाई से बनाता था हेरोइन जैसा नशा, दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने 5 करोड़ का ट्रामाडोल किया जब्त
Bihar Crime: जहर के संगीन कारोबार का पर्दाफाश करते हुए दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने नकली दवाओं के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है।
Bihar Crime: जहर के संगीन कारोबार का पर्दाफाश करते हुए दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने नकली दवाओं के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। छापेमारी के दौरान करीब 5 करोड़ रुपये कीमत का ट्रामाडोल बरामद हुआ, जिसका इस्तेमाल नशे के आदी लोग हेरोइन के विकल्प के तौर पर कर रहे थे। यह पूरा गिरोह फर्जी मेडिकल स्टोर्स और जाली चिकित्सा केंद्रों की आड़ में मौत का सौदा कर रहा था।
जांच में सामने आया कि इस रैकेट का मास्टरमाइंड अरुण कुमार, मूल रूप से बिहार के गया का रहने वाला है। उसने मोटा मुनाफा कमाने की लालच में एक विशाल फैक्ट्री खड़ी की, जहां तस्करी कर लाए गए ट्रामाडोल पाउडर से गोलियां तैयार की जाती थीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस पाउडर की कीमत पांच करोड़ से ज्यादा आंकी गई है। इसी कच्चे माल को प्रोसेस कर ऊंचे दामों पर सप्लाई किया जाता था।
खुलासा हुआ है कि गिरोह केवल ट्रामाडोल तक सीमित नहीं था, बल्कि नकली सिरप, इंजेक्शन और अलग-अलग किस्म की दवाओं का भी निर्माण करता था। सहायक औषधि नियंत्रक विजय कुमार के मुताबिक, “स्टेट लाइव साइंस प्राइवेट लिमिटेड” नामक फैक्ट्री ममता कुमारी के नाम पंजीकृत थी, लेकिन असल संचालन उनके पति अरुण के हाथ में था। लाइसेंस केवल 10 तरह की टैबलेट के परीक्षण उत्पादन के लिए था, मगर उसी आड़ में जाली दवाओं का बड़े पैमाने पर निर्माण कर दिल्ली, गया समेत कई शहरों में सप्लाई की जा रही थी।
विश्वसनीय खुफिया इनपुट के बाद विभिन्न राज्यों में समन्वित छापेमारी की गई। दो फर्जी फैक्ट्रियों का भंडाफोड़ हुआ और नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सप्लायर्स और अवैध मेडिकल स्टोर्स की तलाश में जुटी है।
ये जहर इतना खतरनाक है कि इससे सांस की रफ्तार धीमी होकर दम घुट सकता है, यहीं नहीं याददाश्त और मानसिक संतुलन बिगड़ सकता है। ट्रामाडोल के दुरुपयोग से लिवर व किडनी फेल हो सकती है,दिल की धड़कन अनियंत्रित होकर हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है, यहीं नहीं कम समय में गंभीर लत लग जाती है।