Bihar teacher News: गुरु जी बने जुए के खिलाड़ी,रंगे हाथ पकड़े गए सरकारी शिक्षक, खाकी की रेड में खुला गंदा खेल, इलाके में थू-थू

Bihar teacher News: दो शिक्षकों ने शिक्षा व्यवस्था के चेहरे पर काला दाग लगा दिया है।...

,रंगे हाथ पकड़े गए सरकारी शिक्षक- फोटो : reporter

Bihar teacher News: दो शिक्षकों ने शिक्षा व्यवस्था के चेहरे पर काला दाग लगा दिया है। जिन कंधों पर बच्चों का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी होती है, वही आज जुए के फड़ पर किस्मत आजमाते हुए पकड़े गए। जमुई के खैरा थाना क्षेत्र में पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर दो सरकारी शिक्षकों समेत चार लोगों को रंगेहाथ जुआ खेलते हुए धर दबोचा। मामला खैरा शिव मंदिर के पीछे स्थित कचरा प्रसंस्करण इकाई का बताया जा रहा है, जहां खामोशी के पर्दे में अवैध जुए का खेल चल रहा था। जैसे ही पुलिस को भनक लगी, थानाध्यक्ष मिंटू कुमार ने दलबल के साथ दबिश दी और पूरे खेल का भंडाफोड़ कर दिया। मौके से चार लोगों को जुआ खेलते हुए पकड़ा गया, जिनमें दो सरकारी शिक्षक भी शामिल हैं।

गिरफ्तार शिक्षकों की पहचान संजय यादव (उत्क्रमित मध्य विद्यालय, श्रृंगारपुर) और शिव कुमार शर्मा (उत्क्रमित मध्य विद्यालय, नोनियाटांड) के रूप में हुई है। इनके साथ दीपक मिश्रा और पप्पू साव नामक दो अन्य व्यक्ति भी इस जुए की महफिल में शामिल पाए गए।

पुलिस की इस कार्रवाई ने इलाके में सनसनी फैला दी है। जिस जगह बच्चों को संस्कार और अनुशासन का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए, वहीं के शिक्षक कानून तोड़ने की बाजी खेलते पकड़े गए। स्थानीय लोग इस घटना को लेकर खासे आक्रोशित हैं और शिक्षकों के इस कृत्य को शर्मनाक और निंदनीय बता रहे हैं।

थाना प्रभारी मिंटू कुमार ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी की गई थी, जिसमें चारों आरोपियों को रंगेहाथ जुआ खेलते पकड़ा गया। सभी के खिलाफ मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। यह घटना सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि समाज के उस आईने को दिखाती है जहां आदर्श माने जाने वाले लोग ही नियमों की धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं। बच्चों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाले अगर खुद गैरकानूनी खेल में लिप्त हों, तो आने वाली पीढ़ी क्या सीखेगी यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

जमुई की यह घटना अब हर गली-चौराहे पर चर्चा का विषय बनी हुई है, और लोग यही कह रहे हैं जब गुरु ही गुमराह हों, तो राह कौन दिखाएगा?

सुमित सिंह की रिपोर्ट