बिहार में धर्मांतरण के जाल का भंडाफोड़, सीमांचल में 29 लोगों की घर वापसी, बड़े रैकेट के खुलासे से मचा हड़कंप

Bihar Crime: सीमांचल इलाके से एक बार फिर धर्मांतरण के धंधे और उससे जुड़े कथित खेल का मामला सुर्खियों में है...

धर्मांतरण के जाल का भंडाफोड़- फोटो : reporter

Bihar Crime: सीमांचल इलाके से एक बार फिर धर्मांतरण के धंधे और उससे जुड़े कथित खेल का मामला सुर्खियों में है, लेकिन इस बार कहानी में बड़ा मोड़ देखने को मिला है। कटिहार के मनिहारी क्षेत्र में छह परिवारों के कुल 29 लोगों ने क्रिश्चियन धर्म को छोड़कर फिर से सनातन धर्म में घर वापसी कर ली है। इस घटना ने इलाके में नई बहस और हलचल पैदा कर दी है।

बताया जा रहा है कि ये सभी परिवार आदिवासी समुदाय से जुड़े हैं, जो लंबे समय से गरीबी, अशिक्षा और मजबूरी के हालात से जूझ रहे थे। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर कथित तौर पर धर्मांतरण कराने वाले लोगों ने उन्हें रोजगार, बेहतर इलाज और बच्चों की मुफ्त तालीम का झांसा दिया। इन वादों के दम पर उन्हें अपने मूल धर्म से दूर कर दिया गया।

लेकिन वक्त के साथ जब ये वादे खोखले साबित हुए और जमीनी हकीकत कुछ और निकली, तो इन परिवारों ने खुद को ठगा हुआ महसूस किया। इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर इस रैकेट से किनारा करते हुए एक बार फिर अपने पुराने धर्म की ओर लौटने का फैसला लिया। हिंदू संगठनों की मदद से विधि-विधान के साथ इन सभी 29 लोगों की घर वापसी कराई गई।

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, यह सिलसिला यहीं थमने वाला नहीं है। इलाके के कई और परिवार भी अब इसी राह पर चलने की तैयारी में हैं। हालांकि, सुदूर इलाकों में रहने वाले लोग खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं, लेकिन अंदरखाने ‘धर्मांतरण के नेटवर्क’ को लेकर चर्चाएं तेज हैं।

मनिहारी विधानसभा क्षेत्र, जो अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है, वहां इस तरह की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। अब यह घर वापसी न सिर्फ सामाजिक, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गई है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या वाकई धर्मांतरण के नाम पर कोई बड़ा ठगी नेटवर्क काम कर रहा है, या फिर यह महज परिस्थितियों का खेल है? जो भी हो, इस घटना ने सीमांचल में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

रिपोर्ट- श्याम कुमार सिंह