Bihar Police: वर्दी की हनक या कानून का कहर?पिटाई के बाद तीन युवक पहुंचे सलाखों के पीछे, वजह जान कर चौक जाएंगे आप
Bihar Police: टिकट जेब में, सफर का ख्वाब आंखों में लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था, क्योंकि पाला बिहार पुलिस से जो पड़ गया था...
Bihar Police: कटिहार रेल मंडल के बारसोई जंक्शन से उठी एक मामूली चिंगारी अब सियाही भरी सुर्खियों में तब्दील हो गई है। कदवा प्रखंड के भैंसबांधा गांव का एक युवक अपने दोस्तों के साथ मानसी होते हुए पुणे जाने के इरादे से स्टेशन पहुंचा था। टिकट जेब में, सफर का ख्वाब आंखों में लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
स्टेशन परिसर में शौचालय की मुकम्मल व्यवस्था न होने के कारण युवक टूटी-फूटी नाला के पास पेशाब करने लगा। बस यही खता उसकी गिरफ्तारी की वजह बन गई। आरोप है कि मौके पर तैनात रेल पुलिस के जवानों ने वर्दी की सख्ती दिखाते हुए युवक को पकड़ लिया और उसे आरपीएफ पोस्ट ले जाया गया। परिजनों का इल्जाम है कि इस दौरान मारपीट भी की गई।
नियमों के मुताबिक इस तरह के मामले में जुर्माना वसूल कर चेतावनी देकर छोड़ा जा सकता था। लेकिन मामला यहीं थमता नजर नहीं आया।रेलवे सुरक्षा बल के कमांडेंट के अनुसार युवक को फाइन की प्रक्रिया के लिए पोस्ट लाया गया था, तभी उसके साथियों ने भीड़ जुटाकर पोस्ट पर हंगामा खड़ा कर दिया। आरोप है कि सरकारी कामकाज में दखलंदाजी की गई और माहौल को तनावपूर्ण बना दिया गया।
इसके बाद कहानी ने नया मोड़ लिया। सरकारी कार्य में बाधा, हंगामा और अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज हुआ और युवक समेत उसके दो साथियों कुल तीन लोगों को गिरफ्तार कर कोर्ट के आदेश पर जेल भेज दिया गया।
घटना के बाद इलाके में गुस्से की लहर दौड़ गई है। स्थानीय बुद्धिजीवी और जनप्रतिनिधि रेल पुलिस की कार्रवाई को जरूरत से ज्यादा सख्त बता रहे हैं। सवाल उठ रहा है क्या यह कानून की हिफाजत थी या वर्दी की हनक?
बारसोई जंक्शन की इस घटना ने एक बार फिर कानून और इंसाफ के बीच की महीन लकीर पर बहस छेड़ दी है। आखिर मामूली गलती पर इतनी बड़ी कार्रवाई क्या यही न्याय है, या फिर सिस्टम की सख्ती का एक और चेहरा?
रिपोर्ट- श्याम कुमार सिंह