Bihar Fake IAS Officer: IAS का ऐसा जलवा कि पुलिस भी हुई बैकफुट पर! PMO, डोभाल और GOVT OF INDIA के नाम पर रौब,अब खुल रही है फर्जी अफसर की पूरी कुंडली, सात घंटे की रेड में भी साहब का तेवर देख कर हैरान रह गए अफसर

Bihar Fake IAS Officer: कभी खुद को PMO का अधिकारी बताने वाला मनीष ऐसा रौब गांठता था कि आसपास के लोग भी उससे फासला बनाए रखते थे।...

सात घंटे की रेड में भी साहब का तेवर देख कर हैरान रह गए अफसर- फोटो : reporter

Bihar Fake IAS Officer: खगड़िया में पकड़े गए कथित फर्जी IAS मनीष गुप्ता की कहानी जितनी रहस्यमय है, उसकी परतें खुलने के बाद मामला उतना ही संगीन होता जा रहा है। कभी खुद को PMO का अधिकारी बताने वाला मनीष ऐसा रौब गांठता था कि आसपास के लोग भी उससे फासला बनाए रखते थे। दावा करता था कि उसकी सीधी बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से होती है। यानी मोहल्ले में आम आदमी नहीं, मानो सत्ता के गलियारों का कोई ‘खास किरदार’ घूम रहा हो। लेकिन पुलिस की छापेमारी ने इस कथित रुतबे की असलियत सामने ला दी।

खगड़िया के गोगरी थाना पुलिस को खबर मिली थी कि जमालपुर में रहने वाला मनीष गुप्ता अपनी गाड़ियों पर ‘GOVT OF INDIA’ का बोर्ड लगाकर खुद को IAS अधिकारी बताता है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने 8 अगस्त की रात उसके ठिकाने पर दस्तक दी। घर के सामने दो गाड़ियां खड़ी थीं और दोनों पर सरकारी बोर्ड चमक रहा था। बाहर एक शख्स हाफ पैंट और टी-शर्ट में घूम रहा था। पूछताछ हुई तो जनाब ने पूरे आत्मविश्वास से अपना परिचय दिया ‘मेरा नाम मनीष गुप्ता है, मैं सीनियर IAS हूं और अजित डोभाल की टीम में काम करता हूं।’

इतना ही नहीं, मोबाइल में मौजूद कथित आई-कार्ड भी पुलिस के सामने पेश कर दिया। चेहरे पर ऐसा कॉन्फिडेंस था कि कुछ पल के लिए वर्दी वाले भी ठिठक गए। लेकिन कानून की नजर रुतबे से नहीं, दस्तावेज से चलती है। आई-कार्ड की जांच हुई तो उसकी पोल खुल गई। कार्ड फर्जी निकला और जिस अफसरी का इतना जलवा था, उसकी बुनियाद ही कागजी निकली।पुलिस सूत्रों के मुताबिक मनीष के घर करीब सात घंटे तक तलाशी चली। इस दौरान भी कथित फर्जी IAS का तेवर कम नहीं हुआ। वह पुलिस अधिकारियों से तू-तड़ाक करता रहा और बार-बार खुद को बड़ा अफसर बताते हुए पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कराने तक की धमकी देता रहा। यानी नकली पहचान का नकाब उतरने के बाद भी हुक्म चलाने की आदत बरकरार थी।

तलाशी में पुलिस को 5 Apple मोबाइल फोन, MacBook, iPad और 4 TB की हार्ड डिस्क मिली। अब असली राज इन्हीं डिजिटल उपकरणों के भीतर छिपे होने की आशंका है। कॉल रिकॉर्ड, चैट, ई-मेल, सोशल मीडिया अकाउंट, तस्वीरें, वीडियो, दस्तावेज और बैंकिंग गतिविधियां पुलिस को उसके कथित नेटवर्क की पूरी तस्वीर दिखा सकती हैं।बताया गया है कि मनीष मोबाइल और आईपैड का पासवर्ड साझा नहीं कर रहा है। ऐसे में पुलिस तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से इन उपकरणों को अनलॉक कराने की कोशिश कर सकती है। अगर डिजिटल फोरेंसिक की गांठ खुली तो शायद यह पता चले कि ‘साहब’ की पहुंच वास्तव में कहां तक थी और किन लोगों के साथ उसका संपर्क था।

तलाशी के दौरान बड़ी संख्या में बैंकिंग दस्तावेज भी मिले। पुलिस ने 20 क्रेडिट कार्ड, 8 डेबिट कार्ड और 4 चेकबुक बरामद किए हैं। FIR में कुछ कार्डों पर दूसरे नाम दर्ज होने की बात भी सामने आई है। अब पुलिस खातों, KYC और बैंक स्टेटमेंट के जरिए यह पता लगाने में जुट सकती है कि इन कार्डों का इस्तेमाल किसने किया और पैसों का लेनदेन कहां-कहां हुआ। घर में CCTV कैमरों की व्यवस्था भी मिली और पुलिस ने DVR जब्त कर लिया। यह DVR उस कोठी में आने-जाने वालों का खामोश गवाह साबित हो सकता है। कौन आया, कब आया और कितनी देर रुका—जांच आगे बढ़ने पर कई सवालों के जवाब इसी फुटेज से निकल सकते हैं।

मनीष के नेटवर्क से अमेरिका और कनाडा से कथित लेनदेन की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि उपलब्ध FIR में विदेशी लेनदेन की स्पष्ट पुष्टि दर्ज नहीं है। इसलिए फिलहाल यह जांच का विषय है। अगर बैंक रिकॉर्ड में विदेश से जुड़े ट्रांजेक्शन मिलते हैं तो पुलिस को उसके स्रोत, लाभार्थी और रकम के इस्तेमाल की पड़ताल करनी होगी। छापेमारी में 31 लीटर विदेशी शराब, बारहसिंगा के दो सींग और एक कछुआ भी बरामद होने की बात सामने आई है। अब पुलिस यह भी पता कर रही है कि सींगों का इस्तेमाल किस मकसद से किया जाता था और वे वहां पहुंचे कैसे।

मनीष के बचपन के एक क्लासमेट के मुताबिक उसका जन्म 1975 में हुआ था। शुरुआती पढ़ाई जमालपुर-गोगरी इलाके के सरकारी स्कूल में हुई। 1991 में मैट्रिक परीक्षा में उसने टॉप किया था। पढ़ाई में तेज मनीष इंटर तक स्थानीय स्तर पर पढ़ा, फिर आगे की पढ़ाई के लिए बड़े भाई के पास दिल्ली चला गया। इसके बाद पुराने दोस्तों से उसका संपर्क धीरे-धीरे कम होता गया।

41 साल की उम्र में अविवाहित मनीष ने करीब पांच कट्ठे की कोठी को अपना ऐसा ठिकाना बना लिया था, जहां से बाहर की दुनिया पर नजर रखी जा सके, मगर अंदर की दुनिया की खबर बाहर न पहुंचे। बचपन के दोस्त बताते हैं कि दिल्ली से लौटने के बाद उसने पुराने साथियों से भी दूरी बना ली थी और किसी को घर के भीतर आसानी से प्रवेश नहीं देता था। कहा जाता है कि उसकी कोठी के स्वीमिंग पूल में कछुआ भी पाला गया था। मान्यता थी कि कछुआ घर में रखने से धन की बढ़ोतरी होती है। अब वही कछुआ, सरकारी बोर्ड, फर्जी आई-कार्ड, विदेशी शराब, बैंकिंग दस्तावेज और डिजिटल उपकरण सब मिलकर एक ऐसे रहस्य की ओर इशारा कर रहे हैं, जिसकी असली तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर शुरुआती जांच में 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति की बात सामने आ रही है, तो इस कथित फर्जी IAS ने इतनी दौलत आखिर जुटाई कैसे? क्या यह महज फर्जी रुतबे का खेल था, या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क, आर्थिक लेनदेन और रसूख का तंत्र काम कर रहा था? फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। लेकिन इतना जरूर है जिस अफसरी के नाम पर मनीष दूसरों को धमकाता था, अब उसी रौब की एक-एक परत कानून की छन्नी से छन रही है।