सॉफ्टवेयर इंजीनियर की डबल लाइफ: दिन में कोडिंग रात में 26 घरों में डाला डाका, BMW खरीदी, 1 किलो सोना 6 किलो चांदी उड़ाई
यह खबर किसी फिल्म की पटकथा जैसी लगती है, जहाँ एक पढ़ा-लिखा सॉफ्टवेयर इंजीनियर रात के अंधेरे में 'मास्क मैन' बनकर चोरी की वारदातों को अंजाम देता था।
एक प्रतिष्ठित आईटी कंपनी में कार्यरत महेश रेड्डी उर्फ सन्नी दिन में कोड लिखता था और रात में शातिर तरीके से चोरियों को अंजाम देता था। पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद अच्छी सैलरी वाली नौकरी होने के बावजूद महेश को लग्जरी लाइफस्टाइल और ऐशो-आराम का चस्का लग गया था। इसी शौक को पूरा करने के लिए उसने अपराध की राह चुनी और विशाखापट्टनम के विभिन्न इलाकों में २६ घरों को अपना निशाना बनाया।
'मास्क मैन' का चोरी का तरीका
महेश रेड्डी बेहद शातिर तरीके से वारदात करता था। वह हमेशा अकेले ही चोरी के लिए निकलता और अपनी पहचान छिपाने के लिए चेहरे पर मास्क और हाथों में ग्लव्स (दस्ताने) पहनता था। इसी वजह से पुलिस ने उसे 'मास्क चोर' का नाम दिया था। वह हैदराबाद से विशाखापट्टनम आता और उन घरों की रेकी करता जो सुनसान होते थे। पुलिस को सीसीटीवी फुटेज में संदिग्ध गतिविधियां तो दिखती थीं, लेकिन मास्क के कारण उसका चेहरा पहचानना लगभग नामुमकिन था।
चोरी के पैसों से बीएमडब्ल्यू और पार्टियां
आरोपी ने चोरी की रकम का इस्तेमाल किसी मजबूरी के लिए नहीं, बल्कि अपनी रईसी दिखाने के लिए किया। पुलिस जांच में सामने आया है कि महेश ने चोरी के पैसों से एक चमचमाती BMW कार खरीदी थी और वह अपने दोस्तों को महंगी पार्टियां देता था। पिछले साल अक्टूबर में गाजुवाका इलाके में हुई १७ तोला सोना और ३० तोला चांदी की चोरी के बाद पुलिस ने जब तकनीकी सर्विलांस और गहन जांच शुरू की, तब जाकर इस हाई-प्रोफाइल चोर का कच्चा चिट्ठा खुला।
बरामदगी और आपराधिक इतिहास
पुलिस ने महेश रेड्डी को गिरफ्तार कर उसके पास से करीब ७०० ग्राम सोना, ३.८ किलोग्राम चांदी और वारदात में इस्तेमाल होने वाले आधुनिक उपकरण जैसे ड्रिल मशीन, कटर और आयरन रॉड बरामद किए हैं। साथ ही उसकी BMW कार भी जब्त कर ली गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि महेश किशोरावस्था से ही अपराध में शामिल रहा है और उस पर पहले से ६० से अधिक मामले दर्ज हैं। फिलहाल पुलिस उससे अन्य संभावित वारदातों के बारे में पूछताछ कर रही है।