Bihar Police: तीन ASI पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार,गवाही नहीं देने पर पुलिस अफसर फंसे, स्पेशल कोर्ट ने जारी किया वारंट

Bihar Police: गवाही देने से कन्नी काटने वाले तीन तत्कालीन सहायक सब इंस्पेक्टर अब खुद कानून के शिकंजे में फंसते नजर आ रहे हैं।

तीन ASI पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार- फोटो : X

Bihar Police:पॉक्सो एक्ट केस में गवाही देने से कन्नी काटने वाले तीन तत्कालीन सहायक सब इंस्पेक्टर अब खुद कानून के शिकंजे में फंसते नजर आ रहे हैं। पांच साल पुराने मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए तीनों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है।बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के अहियापुर थाना इलाके से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस महकमे की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। 

विशेष पॉक्सो कोर्ट संख्या-एक के न्यायाधीश धीरेंद्र मिश्र ने गुरुवार को अखिलेश प्रसाद, सुमनजी झा और त्रिलोकीनाथ झा के खिलाफ यह आदेश जारी किया। ये तीनों अलग-अलग समय पर इस केस के जांच अधिकारी (आईओ) रह चुके हैं, लेकिन लगातार कोर्ट में पेश नहीं होने से केस की सुनवाई ‘अटक’ गई थी।

कोर्ट ने इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए अहियापुर थानाध्यक्ष को वारंट की कॉपी भेजने का आदेश दिया है। अब पुलिस पर ही अपने ‘पूर्व अफसरों’ को गिरफ्तार करने की जिम्मेदारी आ गई है। मामले की अगली सुनवाई एक अप्रैल को तय की गई है, जिससे पहले इन तीनों की गिरफ्तारी को लेकर दबाव बढ़ गया है।

दरअसल, यह पूरा मामला 2 मार्च 2021 को दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, एक मार्च 2021 की दोपहर वह अपने भतीजे और दो भतीजियों के साथ घर लौट रहा था। इसी दौरान रास्ते में आरोपी अरविंद कुमार उर्फ अरविंद ठाकुर ने उसकी भतीजियों के साथ छेड़खानी शुरू कर दी। विरोध करने पर मामला मारपीट और गाली-गलौज तक पहुंच गया।

आरोप है कि अरविंद के साथ उसके भाई सुनील ठाकुर, सचिन ठाकुर और धीरेंद्र ठाकुर उर्फ धर्मेंद्र ठाकुर भी गिरोह बनाकर हमला करने लगे और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए पीड़ित पक्ष को पीटा।

केस की जांच अलग-अलग समय में तीनों एएसआई ने की थी। इनमें अखिलेश प्रसाद ने 25 सितंबर 2021 को दो आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, जबकि अन्य के खिलाफ जांच लंबित रही। फिलहाल कोर्ट में सेशन ट्रायल चल रहा है।

पांच गवाहों में से दो की गवाही हो चुकी है, लेकिन तीनों आईओ के कोर्ट में हाजिर न होने से पूरा केस लटका पड़ा है। अब कोर्ट के इस कड़े रुख से साफ है कि ड्यूटी से भागने वाले अफसरों को भी बख्शा नहीं जाएगा।

रिपोर्ट- मणिभूषण शर्मा