Bihar Crime: डीलरशिप का लॉलीपॉप दिखाकर साइबर ठगों ने उड़ाई मोटी रकम,फर्जी कंपनी का प्रतिनिधि निकला अपराधी

Bihar Crime: नवादा जिले में साइबर अपराधियों ने ठगी का नया जाल बिछाते हुए सीमेंट और छड़ कारोबारी को टीएमटी सरिया की डीलरशिप दिलाने का झांसा देकर 5 लाख 21 हजार रुपये की चपत लगा दी।

लॉलीपॉप दिखाकर साइबर ठगी- फोटो : social Media

Bihar Crime: नवादा जिले में साइबर अपराधियों ने ठगी का नया जाल बिछाते हुए सीमेंट और छड़ कारोबारी को टीएमटी सरिया की डीलरशिप दिलाने का झांसा देकर 5 लाख 21 हजार रुपये की चपत लगा दी। कौआकोल थाना क्षेत्र के खैरा गांव निवासी व्यवसायी अनिल कुमार इस साइबर ठगी का शिकार हुए हैं। आरोप है कि ठगों ने खुद को टीएमटी सरिया कंपनी का प्रतिनिधि बताकर कारोबारी को आकर्षक डीलरशिप का सपना दिखाया और फिर कंपनी के नाम पर रकम ट्रांसफर करा ली।

पीड़ित अनिल कुमार के अनुसार, उन्हें एक अज्ञात मोबाइल नंबर से फोन आया था। फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को एक टीएमटी सरिया कंपनी का प्रतिनिधि बताया। बातचीत के दौरान उसने अनिल कुमार को कंपनी की डीलरशिप लेने का प्रस्ताव दिया। ठग ने कारोबारी को भरोसा दिलाया कि डीलरशिप मिलने के बाद उन्हें बाजार की तुलना में काफी कम कीमत पर टीएमटी सरिया उपलब्ध कराया जाएगा।

कारोबार बढ़ाने के लालच में अनिल कुमार ने प्रस्ताव में दिलचस्पी दिखाई। इसके बाद कथित कंपनी प्रतिनिधि ने डीलरशिप की प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर उनसे 5 लाख 21 हजार रुपये जमा कराने को कहा। साइबर ठग ने बाकायदा भरोसा दिलाया कि रकम जमा होते ही सरिया की खेप उनके प्रतिष्ठान तक पहुंचा दी जाएगी। कारोबारी उसके झांसे में आ गए और बताई गई बैंक खाते की जानकारी के आधार पर पूरी रकम ट्रांसफर कर दी।लेकिन रकम खाते में पहुंचते ही साइबर ठग का असली चेहरा सामने आ गया। पैसे ट्रांसफर करने के बाद जब अनिल कुमार ने फोन करने वाले व्यक्ति से संपर्क साधने की कोशिश की तो उसका मोबाइल बंद मिला। कई बार कॉल करने के बावजूद संपर्क नहीं हो सका। इसके बाद कारोबारी को पूरे मामले पर शक हुआ।

मामले की तह तक जाने के लिए अनिल कुमार ने कंपनी के दूसरे अधिकारी से संपर्क किया। वहां से उन्हें जो जानकारी मिली, उसने उनके पैरों तले जमीन खिसका दी। कंपनी के अधिकारी ने बताया कि उनके नाम पर न तो 5 लाख 21 हजार रुपये का कोई भुगतान प्राप्त हुआ है और न ही उनके लिए किसी तरह की डीलरशिप प्रक्रिया शुरू की गई है।इसके बाद अनिल कुमार को यकीन हो गया कि वह साइबर अपराधियों के सुनियोजित जाल में फंस चुके हैं। ठगों ने कारोबारी की व्यावसायिक जरूरत और सस्ते दाम पर सरिया मिलने के लालच को हथियार बनाया और रकम अपने खाते में ट्रांसफर करा ली।

पीड़ित व्यवसायी ने मामले की शिकायत साइबर थाने में दर्ज कराई है। प्राथमिकी के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। साइबर पुलिस अब कॉल करने वाले व्यक्ति, बैंक खाते, रकम के लेन-देन और मोबाइल नंबर से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है। पुलिस का प्रयास है कि ठगी के इस नेटवर्क में शामिल आरोपितों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जा सके और ठगी की रकम की बरामदगी की दिशा में भी कार्रवाई हो।इस घटना ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि ऑनलाइन और फोन के जरिए मिलने वाली आकर्षक डीलरशिप या कारोबार से जुड़े प्रस्तावों की बिना सत्यापन स्वीकार करना भारी पड़ सकता है। साइबर अपराधी अब कारोबारी मुनाफे और डीलरशिप जैसे ऑफर का इस्तेमाल कर लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं।

रिपोर्ट- अमन कुमार