बख्तियारपुर में पुलिस की गुंडागर्दी? चाय के पैसे मांगने पर दुकानदार की पिटाई मामले में एक्शन, छिछालेदर के बाद एसपी ने एएसआई समेत दो को नापा
Bihar Police: बिहार पुलिस की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पटना जिले के बख्तियारपुर से सामने आई घटना ने कानून के रखवालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर बहस छेड़ दी है।
Bihar Police: बिहार पुलिस की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पटना जिले के बख्तियारपुर से सामने आई घटना ने कानून के रखवालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर बहस छेड़ दी है। आरोप है कि चाय पीने के बाद जब एक पुलिसकर्मी से दुकानदार ने अपना बकाया मांगा, तो वर्दी का नशा इस कदर हावी हो गया कि मामूली विवाद देखते ही देखते मारपीट और कथित पुलिसिया दबंगई में बदल गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पहले एक पुलिसकर्मी ने चाय विक्रेता के साथ कथित तौर पर गाली-गलौज की और थप्पड़ मारे। इसके बाद सूचना मिलते ही उसके अन्य साथी भी मौके पर पहुंच गए। आरोप है कि सभी ने मिलकर दुकानदार को सरेआम पीटा, धक्का-मुक्की की और घसीटते हुए अपने साथ ले गए। इस पूरी घटना से आसपास के व्यापारियों और स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल बन गया।
घटना का वीडियो मौके पर मौजूद एक स्थानीय व्यक्ति ने अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में पुलिसकर्मियों का व्यवहार सवालों के घेरे में है। वीडियो सामने आने के बाद लोगों में नाराजगी बढ़ी और पुलिस महकमे की कार्यशैली पर तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं।
संपादक (अपराध) कुलदीप भारद्वाज की स्पेशल रिपोर्ट न्यूज4नेशन पर खबर चलने के बाद व पुलिस की किरकीरी और मामला तूल पकड़ने के बाद ग्रामीण एसपी कुंदन कुमार ने कार्रवाई करते हुए बख्तियारपुर थाना के एएसआई संजय कुमार और होमगार्ड जवान अंकित कुमार को निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई एसडीपीओ-2 आयुष श्रीवास्तव की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई।
हालांकि, इस कार्रवाई के बाद भी बड़ा सवाल कायम है। क्या केवल निलंबन ही पर्याप्त कार्रवाई है? यदि किसी आम नागरिक पर इस तरह का आरोप लगता, तो उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू हो सकती थी। ऐसे में जब आरोप पुलिसकर्मियों पर हों, तो क्या विभागीय निलंबन भर से जवाबदेही तय हो जाती है, या फिर निष्पक्ष आपराधिक जांच और कानूनी कार्रवाई भी होनी चाहिए? सवाल है कानून की कौन से धारा में चाय के पैसे मांगने पर थप्पड़ मांगने का अधिकार इन एएसआई को मिला है?
यह घटना केवल एक दुकानदार से कथित मारपीट का मामला नहीं है, बल्कि पुलिस की जवाबदेही और जनता के भरोसे से भी जुड़ा मुद्दा है। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं, तो दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई होना आवश्यक है। निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई ही पुलिस की साख को मजबूत कर सकती है और यह संदेश दे सकती है कि कानून सबके लिए समान है चाहे वह आम नागरिक हो या वर्दीधारी।