Bihar Police: सोनू -मोनू गैंग ने पुलिस की हीं शुरु की तलाशी, घर में घुसने से पहले बिहार पुलिस की हुई चेकिंग, सम्राट राज में उल्टी बहती कानून की बयार
Bihar Police: कुख्यात सोनू मोनू गैंग के घर तलाशी लेने पहुंची पुलिस टीम को पहले खुद तलाशी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा, उसके बाद ही घर के अंदर एंट्री दी गई।
Bihar Police: पटना के बाढ़ के पंचमहला थाना क्षेत्र अंतर्गत नौरंगा जलालपुर में उस वक्त कानून-व्यवस्था पर सवालों की बौछार हो गई जब पुलिस और कुख्यात गिरोह के बीच ऐसा उल्टा खेल देखने को मिला, जिसने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया। आरोप है कि कुख्यात सोनू मोनू गैंग के घर तलाशी लेने पहुंची पुलिस टीम को पहले खुद तलाशी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा, उसके बाद ही घर के अंदर एंट्री दी गई।
सूत्रों के मुताबिक बीती रात फायरिंग की एक सनसनीखेज घटना के बाद पुलिस टीम अचानक बिना वारंट के कथित तौर पर सोनू-मोनू के ठिकाने पर पहुंची थी। टीम का नेतृत्व कर रहे अधिकारी और पुलिसकर्मी जैसे ही घर के बाहर पहुंचे, वहां पहले से मौजूद गैंग से जुड़े लोगों ने माहौल को पूरी तरह टेंशन से भर दिया। बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई और स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पुलिस की एंट्री ही सवालों के घेरे में आ गई।
चौंकाने वाली बात यह रही कि कथित रूप से पहले पुलिस और गैंग के बीच मोबाइल पर बातचीत हुई, जिसमें तलाशी को लेकर बहस चलती रही। इसी दौरान पंचमहला थाना प्रभारी वीडियो बनाते रहे और यह दावा किया जाता रहा कि पुलिस बिना वारंट के भी कार्रवाई कर सकती है। लेकिन मौके पर मौजूद स्थानीय मुखिया और सोनू की मां उर्मिला सिन्हा ने तलाशी का विरोध करते हुए माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया।
इसी दौरान जो हुआ, उसने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया। आरोप है कि गैंग से जुड़े लोगों ने पहले पुलिसकर्मियों की तलाशी ली जिसमें हाथीदह थानाप्रभारी समेत करीब पांच पुलिसकर्मी शामिल थे। इसके बाद ही पुलिस को घर के अंदर प्रवेश की अनुमति दी गई। यह घटना जैसे ही इलाके में फैली, लोगों के बीच दहशत और हैरानी दोनों फैल गई।
घर की तलाशी के दौरान पुलिस को एक बाइक बरामद हुई, जिसके बारे में बताया जा रहा है कि वह एक पुराने केस में वांछित थी। हालांकि इस पूरी कार्रवाई को लेकर पुलिस की भूमिका और प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार यह पहली बार है जब किसी आपराधिक जांच के दौरान पुलिस को ही इस तरह शर्तों के आधार पर एंट्री दी गई हो।
घटना के बाद अब प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। सवाल उठ रहा है कि क्या कानून अब अपराधियों के दरवाजे पर भी कमजोर पड़ने लगा है? क्या पुलिस की कार्रवाई अब गैंग के नियमों पर चलेगी? और सबसे बड़ा सवाल क्या इस पूरे प्रकरण पर उच्च अधिकारी कोई सख्त एक्शन लेंगे या मामला एक और विवाद बनकर दब जाएगा? इस घटना ने बिहार की कानून व्यवस्था को एक बार फिर कठघरे में खड़ा कर दिया है, जहां अपराध और पुलिस के बीच की रेखा धुंधली होती नजर आ रही है।
रिपोर्ट- रविशंकर